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असम चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका: मंत्री नंदिता गरलोसा कांग्रेस में शामिल

असम चुनाव 2026 से पहले बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। हिमंता सरकार की मंत्री नंदिता गरलोसा ने कांग्रेस जॉइन कर ली है। जानिए पूरा राजनीतिक घटनाक्रम और इसके चुनावी अ

India Junction News Desk
23/3/2026
असम चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका: मंत्री नंदिता गरलोसा कांग्रेस में शामिल

गुवाहाटी -: असम में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की सरकार में मंत्री रहीं नंदिता गरलोसा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उनके इस फैसले को चुनाव से ठीक पहले बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। नंदिता गरलोसा दिमा हसाओ जिले की प्रमुख जनजातीय नेता हैं और हाफलोंग सीट से उनका मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है। उन्होंने बीजेपी सरकार में मंत्री के रूप में कार्य करते हुए स्वायत्त परिषद और जनजातीय क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर काम किया था। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना बीजेपी के लिए रणनीतिक नुकसान के तौर पर देखा जा रहा है।

क्यों छोड़ी बीजेपी?

सूत्रों के अनुसार, नंदिता गरलोसा पिछले कुछ समय से पार्टी के भीतर खुद को उपेक्षित महसूस कर रही थीं। टिकट वितरण, स्थानीय नेतृत्व की अनदेखी और क्षेत्रीय मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान न दिए जाने को लेकर उनकी नाराज़गी बढ़ रही थी। माना जा रहा है कि इन्हीं कारणों से उन्होंने कांग्रेस में शामिल होने का फैसला लिया। कांग्रेस ने इस मौके को भुनाते हुए गरलोसा को तुरंत पार्टी में शामिल कर लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे कांग्रेस को दिमा हसाओ और आसपास के जनजातीय इलाकों में मजबूती मिल सकती है। गरलोसा का प्रभाव कांग्रेस के लिए जनजातीय वोट बैंक में सेंध लगाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

बीजेपी के लिए चुनौती

चुनाव से पहले एक मौजूदा मंत्री का पार्टी छोड़ना बीजेपी के लिए चिंता का विषय है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष के संकेत भी मिल रहे हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ एक नेता का व्यक्तिगत फैसला है या फिर बीजेपी के अंदर किसी बड़े असंतोष की शुरुआत? असम की राजनीति में यह घटनाक्रम चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या और भी नेता पार्टी बदलते हैं और बीजेपी इस झटके से कैसे उबरती है। नंदिता गरलोसा का कांग्रेस में शामिल होना सिर्फ एक राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि चुनाव से पहले असम की सियासत में बड़ा संकेत है। यह फैसला आने वाले चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस दोनों की रणनीति पर असर डाल सकता है।

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