उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। नेताओं के बयान अब नए विवादों को जन्म दे रहे हैं, और इसी कड़ी में नगीना सांसद एवं भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
बाराबंकी में आयोजित एक जनसभा के दौरान दिए गए उनके बयान ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। चंद्रशेखर आजाद के भाषण में कथित तौर पर ब्राह्मण और ठाकुर समाज को लेकर की गई टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस विवाद ने तब और तूल पकड़ लिया जब करणी सेना ने उनके कार्यक्रम का विरोध किया। हालात उस वक्त और गरमा गए जब चंद्रशेखर आजाद ने मंच से कहा — “हम चमड़ा उतारना भी जानते हैं और उसका जूता बनाना भी…” और आगे कहा कि समय आने पर उसका इस्तेमाल करना भी जानते हैं।
इस बयान के बाद सामाजिक कार्यकर्ता अभिनव सिंह ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने चंद्रशेखर आजाद पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अगर सनातन धर्म और देवी-देवताओं के खिलाफ बयान दिए जाएंगे, तो उनका विरोध जारी रहेगा।
अभिनव सिंह के इस बयान ने करणी सेना के भीतर ही बगावत की स्थिति पैदा कर दी। संगठन ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए अभिनव सिंह को बाहर का रास्ता दिखा दिया। हालांकि, मामला यहीं शांत नहीं हुआ।
करणी सेना के ही दूसरे गुट, जिसकी अगुवाई सूरज पाल अम्मू कर रहे हैं, ने अभिनव सिंह को अपने संगठन में शामिल कर उन्हें प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया। इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि करणी सेना अब दो धड़ों में बंट चुकी है।
अभिनव सिंह ने संगठन से निकाले जाने के बाद पलटवार करते हुए कहा कि “करणी सेना को शेर नहीं, बल्कि सर्कस में नाचने वाले लोग चाहिए।” उनके इस बयान ने विवाद को और गहरा कर दिया है। फिलहाल, इस पूरे मामले में चंद्रशेखर आजाद अपने बयान पर कायम नजर आ रहे हैं, जबकि करणी सेना के भीतर की खींचतान खुलकर सामने आ गई है। ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।





