नई दिल्ली : मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत में इज़राइल के राजदूत र्यूवेन अजार ने ईरान को लेकर इज़राइल की रणनीति पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि इज़राइल और अमेरिका का उद्देश्य ईरान पर कब्ज़ा करना नहीं है, बल्कि उसके परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से पैदा होने वाले खतरे को रोकना है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान अजार ने कहा कि मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर कई तरह की चुनौतियाँ सामने हैं। उनके अनुसार इज़राइल अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रहा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह ईरान पर आक्रमण कर वहां नियंत्रण स्थापित करना चाहता है।
“हमारा लक्ष्य खतरे को खत्म करना है”
इज़राइली राजदूत ने कहा कि इज़राइल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को लेकर चिंतित रहा है। उनका कहना था कि अगर किसी देश की सैन्य क्षमता क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बनती है, तो उसे रोकना जरूरी हो जाता है। अजार के मुताबिक इज़राइल की प्राथमिकता है कि ईरान के ऐसे कार्यक्रमों को कमजोर किया जाए जो भविष्य में बड़े संघर्ष का कारण बन सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान अपनी नीतियों में बदलाव करता है और तनाव कम करने की दिशा में कदम उठाता है, तो हालात में सुधार संभव है।
“युद्ध हमारा उद्देश्य नहीं”
राजदूत ने यह भी स्पष्ट किया कि इज़राइल का लक्ष्य किसी बड़े युद्ध को बढ़ावा देना नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित हो जाती है तो टकराव की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि कूटनीति और बातचीत हमेशा बेहतर रास्ता होती है, लेकिन जब सुरक्षा को खतरा महसूस होता है तो देशों को अपनी रक्षा के लिए कदम उठाने पड़ते हैं।
मोदी की यात्रा को लेकर भी दिया जवाब
हाल के दिनों में यह चर्चा भी हुई कि भारत के प्रधानमंत्री की इज़राइल यात्रा के बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियाँ तेज हुईं। इस सवाल पर अजार ने कहा कि दोनों घटनाओं को जोड़कर देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई से जुड़े फैसले सुरक्षा हालात और रणनीतिक जरूरतों के आधार पर लिए जाते हैं और इन्हें किसी अन्य देश की यात्रा या कूटनीतिक कार्यक्रम से जोड़ना उचित नहीं है।
अफवाहों पर भी किया खंडन
इसी दौरान सोशल मीडिया पर इज़राइल के प्रधानमंत्री को लेकर फैली कुछ अफवाहों पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। अजार ने कहा कि ऐसी कई खबरें और वीडियो इंटरनेट पर बिना पुष्टि के फैलाए जा रहे हैं, जिन पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय स्रोतों पर ही भरोसा करें।
मध्य-पूर्व में बढ़ती चिंता
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस क्षेत्र पर बनी हुई है। कई देश हालात को शांत करने और बड़े संघर्ष से बचने की अपील कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कूटनीतिक प्रयास सफल होते हैं तो क्षेत्र में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि फिलहाल स्थिति संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले दिनों में घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।




