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चार दोस्तों ने ट्रंप को दे दिया गच्चा, होर्मुज पर पड़ गए अकेले!

होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर अमेरिका की अपील को झटका लगा है। जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे सहयोगी देशों ने सैन्य मिशन में शामिल होने से दूरी बनाई, जिससे अमेरिका कूटनीतिक रूप से अकेला नजर आ रहा है।

India Junction News Desk
16/3/2026
चार दोस्तों ने ट्रंप को दे दिया गच्चा, होर्मुज पर पड़ गए अकेले!

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ा झटका लगा है। फारस की खाड़ी के बेहद अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा को लेकर ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों से सैन्य सहयोग की अपील की थी, लेकिन अमेरिका के करीबी माने जाने वाले कई देशों ने इस मिशन से दूरी बना ली। दरअसल, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते खतरे और तेल टैंकरों पर संभावित हमलों की आशंका के बाद अमेरिका चाहता था कि उसके सहयोगी देश भी अपने युद्धपोत भेजकर एक संयुक्त नौसैनिक मिशन तैयार करें। इस मिशन का उद्देश्य समुद्री रास्ते से गुजरने वाले तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा देना था।

लेकिन जब ट्रंप की इस अपील पर प्रतिक्रिया आई, तो हालात उम्मीद से बिल्कुल अलग नजर आए। जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और कुछ यूरोपीय देशों ने साफ संकेत दिया कि वे फिलहाल इस सैन्य अभियान में शामिल होने के पक्ष में नहीं हैं।

इन देशों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधि बढ़ाने से हालात और अधिक तनावपूर्ण हो सकते हैं। कई सरकारों ने यह भी कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है, न कि किसी संभावित सैन्य टकराव का हिस्सा बनना।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इन देशों की चिंता यह है कि अगर वे सीधे तौर पर इस मिशन में शामिल होते हैं तो उन्हें भी किसी बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में घसीटा जा सकता है। यही वजह है कि कई देशों ने फिलहाल दूरी बनाकर कूटनीतिक रास्ता अपनाने की रणनीति चुनी है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। इस रास्ते से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो उसका असर सीधे वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका इस रास्ते की सुरक्षा को बेहद महत्वपूर्ण मानता है। लेकिन सहयोगी देशों के पीछे हटने से अमेरिका की रणनीति को झटका लगा है और अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिका इस मिशन को अकेले आगे बढ़ाएगा या फिर किसी नई रणनीति के साथ दोबारा सहयोगियों को साथ लाने की कोशिश करेगा। अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह घटनाक्रम वैश्विक शक्ति संतुलन में हो रहे बदलाव की भी ओर इशारा करता है। पहले जहां अमेरिका की अपील पर उसके सहयोगी देश तुरंत साथ खड़े हो जाते थे, वहीं अब कई देश अपने राष्ट्रीय हित और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर फैसले ले रहे हैं। फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में हालात संवेदनशील बने हुए हैं और पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगी देश इस संकट से निपटने के लिए कौन-सी रणनीति अपनाते हैं।

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