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1,800 लोगों ने खींचा 360 टन का किला

जापान के आओमोरी प्रांत में 1,800 लोगों ने मिलकर 360 टन वजनी ऐतिहासिक हिरोसाकी कैसल के मुख्य टावर को रस्सियों से खींचा। भूकंप से क्षतिग्रस्त पत्थर की दीवार की मरम्मत के बाद टावर को उसकी मूल जगह पर वापस लाया जा रहा है। इस अनोखे अभियान में पारंपरिक जापानी तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

India Junction News Desk
25/8/2026
1,800 लोगों ने खींचा 360 टन का किला

जापान में इतिहास और आज की तकनीक का एक बहुत ही सुंदर मेल देखने को मिला। यहाँ करीब 1,800 लोगों ने मिलकर 360 टन वजनी एक पुराने किले के टावर को रस्सियों के सहारे खींचा। यह पूरा नज़ारा आओमोरी प्रांत के हिरोसाकी शहर में देखा गया। लोगों ने 400 साल पुराने हिरोसाकी कैसल के मुख्य टावर को उसकी सही जगह पर वापस पहुँचाने के लिए जापान की पुरानी तकनीक का इस्तेमाल किया। सबसे बड़ी बात यह रही कि इतने भारी टावर को मशीनों से चलाने के बजाय लोगों ने खुद रस्सियाँ खींचकर इस काम में हाथ बँटाया। दो दिनों में टावर को कुल 2.22 मीटर आगे खिसकाया गया। शनिवार को टावर को 1.13 मीटर और रविवार को 1.09 मीटर आगे बढ़ाया गया।

30 मीटर लंबी रस्सियों से खींचा गया टावर

इस खास काम के लिए करीब 30 मीटर लंबी रस्सियों का इस्तेमाल हुआ। जो लोग इसमें शामिल थे, उन्हें अलग-अलग ग्रुप में बाँटा गया और वे बारी-बारी से रस्सियाँ खींचते रहे। टावर को एक पटरी जैसी चीज़ पर रखा गया था ताकि टावर को बहुत धीरे-धीरे आगे बढ़ाया जा सके। इस दौरान लोग जापानी नारे लगाकर सबका उत्साह भी बढ़ाते रहे। इस आयोजन को लेकर लोगों में बहुत जोश देखने को मिला। आयोजकों के पास 1,800 लोगों की जगह के लिए करीब 8,000 आवेदन आए थे। इसका मतलब है कि जितने लोगों को मौका मिला, उससे चार गुना ज़्यादा लोग इसमें शामिल होना चाहते थे। इस काम में शामिल होने वाले लोग सिर्फ हिरोसाकी शहर से ही नहीं, बल्कि जापान के दूसरे हिस्सों और दूसरे देशों से भी आए थे।

‘हिकिया’ तकनीक से बिना तोड़े खिसकाया गया किला

इस पूरे काम में जापान की पुरानी ‘हिकिया’ तकनीक का प्रयोग किया गया। इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें किसी पुरानी इमारत को तोड़ा नहीं जाता, बल्कि रोलर्स और रेल की मदद से उसे धीरे-धीरे एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाता है। हिरोसाकी कैसल का मुख्य टावर एक बहुत ही कीमती विरासत है, इसलिए इसे तोड़कर नया बनाने के बजाय उसकी पुरानी बनावट को ही सुरक्षित रखकर खिसकाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि करीब सौ साल बाद किसी किले को इस तरह ले जाने के लिए इस पुरानी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है। यह कोशिश दिखाती है कि जापान अपनी पुरानी चीज़ों को आज के समय में भी कितनी अच्छी तरह संभाल कर रख रहा है।

2015 में हटाया गया था 360 टन का टावर

हिरोसाकी कैसल की पत्थर वाली दीवार को भूकंप की वजह से नुकसान पहुँचा था। इसी कारण साल 2015 में करीब 360 टन वजनी मुख्य टावर को उसकी असली जगह से हटाकर करीब 80 मीटर दूर ले जाया गया था, ताकि दीवार की मरम्मत की जा सके। इस दीवार को ठीक करने का काम दिसंबर 2024 में पूरा हुआ। इस दौरान दीवार के कुल 2,185 पत्थरों को वापस उनकी पुरानी जगह पर लगाया गया। अब जब दीवार का काम पूरा हो गया है, तो टावर को फिर से उसकी पुरानी जगह पर पहुँचाने का काम शुरू हुआ है। इस काम में पहले लोगों की मदद से टावर को कुछ दूर तक खींचा जा रहा है और उसके बाद बाकी का काम मशीनों की मदद से किया जाएगा।

साल के अंत तक अपनी जगह पर पहुँचेगा टावर

हिरोसाकी कैसल का निर्माण 1611 में हुआ था, जबकि इसका मौजूदा मुख्य टावर 1810 में बनाया गया था। यह जापान में बचे हुए सिर्फ 12 ऐतिहासिक किला-टावरों में से एक है और पूरे तोहोकू क्षेत्र में यह अकेला टावर है। अधिकारियों की योजना है कि अगस्त के अंत तक करीब 4,100 लोगों की मदद से टावर को हाथों से कुल पांच मीटर तक खींचा जाएगा। इसके बाद बाकी की करीब 73 मीटर की दूरी मशीनों से तय की जाएगी और साल के खत्म होने तक टावर को उसकी सही जगह पर पहुँचाने का लक्ष्य है। हालांकि, काम पूरा होने के बाद भी पर्यटकों को इसे देखने के लिए थोड़ा इंतज़ार करना होगा। अभी की योजना के हिसाब से मुख्य टावर को 2033 तक पर्यटकों के लिए फिर से खोला जा सकता है।

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