लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में इतिहास और पहचान की लड़ाई एक बार फिर से शुरू हो गई है। महाराजा सुहेलदेव को लेकर दिए गए बयान के बाद, AIMIM और सुभासपा आमने-सामने आ गए हैं। कुछ दिनों पहले, योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम में महाराजा सुहेलदेव की बहादुरी का जिक्र किया था। उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव ने सालार मसूद को हराया था, और इसके बाद करीब 150 साल तक कोई विदेशी हमलावर भारत पर हमला करने की हिम्मत नहीं कर पाया।
लेकिन मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद, AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने सोशल मीडिया पर एक विवादित टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि महाराजा सुहेलदेव ने भारत की आजादी या निर्माण में कोई योगदान नहीं दिया था, और सालार मसूद गाजी के बारे में गलत इतिहास पेश किया जा रहा है। शौकत अली के बयान के बाद, सियासी माहौल और भी गर्म हो गया। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता और ओम प्रकाश राजभर के बेटे अरुण राजभर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
अरुण राजभर ने एक वीडियो जारी कर कहा कि शौकत अली को इतिहास की सही जानकारी नहीं है, और वे सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश के “खलनायकों को नायक” बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत की रक्षा करने वाले 585 राजाओं में से 165 राजा राजभर समाज से थे, जिन्होंने देश की संस्कृति और अस्मिता की रक्षा की।
यह मुद्दा क्यों अहम है ?
महाराजा सुहेलदेव को लेकर बयानबाजी सिर्फ इतिहास का विवाद नहीं है, बल्कि पूर्वांचल और पिछड़े वर्ग की राजनीति से भी जुड़ा हुआ है। यही वजह है कि यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक केंद्र बनता जा रहा है।
आगे क्या होगा ?
अब सभी की नजर इस बात पर है कि AIMIM की ओर से इस बयान पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, और क्या यह विवाद आने वाले चुनावों में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा।





