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एयर इंडिया का बड़ा फैसला: 5,000 से ज्यादा पायलटों का होगा अनिवार्य ड्रग टेस्ट, फुकेत हादसे के बाद उठाया कदम

फुकेत-दिल्ली हादसे के बाद एयर इंडिया ने अपने 5,000 से ज्यादा पायलटों की अनिवार्य और एक-बारगी ड्रग स्क्रीनिंग शुरू की, 13 अगस्त से टेस्टिंग शुरू हो गई है।

India Junction News Desk
14/8/2026
एयर इंडिया का बड़ा फैसला: 5,000 से ज्यादा पायलटों का होगा अनिवार्य ड्रग टेस्ट, फुकेत हादसे के बाद उठाया कदम

फुकेत-दिल्ली फ्लाइट में हवा में अचानक ऊंचाई गिरने की घटना के बाद एयर इंडिया ने अपने सभी 5,000 से ज्यादा पायलटों का अनिवार्य और एक-बारगी ड्रग स्क्रीनिंग कराने का बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन की तरफ से जारी आंतरिक मेमो के मुताबिक यह टेस्टिंग गुरुवार, 13 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है, और यह एयर इंडिया व उसकी सहयोगी बजट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस, दोनों के बेड़े के पायलटों पर लागू होगी।

मेमो में क्या कहा गया

AFP द्वारा देखे गए एयरलाइन के आंतरिक मेमो में कहा गया है, "हमने अपने सभी ग्रुप पायलटों की ऐसे किसी भी पदार्थ या दवा के लिए पूर्ण स्क्रीनिंग कराने का फैसला किया है, जो मौजूदा नियमों के तहत अनुमति प्राप्त नहीं हैं। यह टेस्टिंग अनिवार्य है और आज से शुरू होगी।" ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह निर्देश एक असाधारण और एक-बारगी कार्रवाई है, जो 13 अगस्त से प्रभावी हो गई है और एयर इंडिया ग्रुप के दोनों एयरलाइनों के पायलटों पर लागू होगी।

मौजूदा नियमों से कहीं ज्यादा सख्त कदम

गौरतलब है कि भारत के मौजूदा नियमों के मुताबिक एयरलाइनों को हर साल अपने कम से कम 10 प्रतिशत उड़ान चालक दल का मनो-सक्रिय पदार्थों (साइकोएक्टिव सब्सटांस) के लिए रैंडम टेस्ट कराना अनिवार्य है। लेकिन इस बार एयर इंडिया ने अपने सभी 5,000 से ज्यादा पायलटों की एक साथ जांच कराने का फैसला लिया है, जो सामान्य नियमों से कहीं ज्यादा सख्त और व्यापक कदम है।

4 अगस्त की घटना बनी वजह

यह फैसला 4 अगस्त 2026 को हुई उस घटना के बाद लिया गया है, जब एयर इंडिया की एक एयरबस A320 फ्लाइट थाईलैंड के फुकेत से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने के तुरंत बाद करीब 91 मीटर (300 फीट) की ऊंचाई खो बैठी थी। इस घटना में कम से कम 24 यात्री घायल हो गए थे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस उड़ान के मुख्य पायलट ने मारिजुआना का सेवन किया था, और उनका दूसरा यानी कन्फर्मेटरी ड्रग टेस्ट भी पॉजिटिव आया था।

एयर इंडिया ने कहा- नतीजे अब तक साझा नहीं हुए

एयर इंडिया ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि जांच से जुड़े परिणाम अब तक आधिकारिक तौर पर एयरलाइन के साथ साझा नहीं किए गए हैं। इसके बावजूद एयरलाइन ने एहतियाती कदम के तौर पर सभी पायलटों की पूर्ण जांच कराने का फैसला लिया है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की कमी न रह जाए।

DGCA के मौजूदा नियम भी हैं सख्त

भारत का नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) पहले से ही उड़ान चालक दल और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स के लिए मनो-सक्रिय पदार्थों की जांच से जुड़े सख्त नियम लागू करता रहा है। इन नियमों के तहत एम्फेटामाइन, कैनाबिस (मारिजुआना), कोकीन, ओपिएट्स और बेंजोडायजेपाइन जैसे पदार्थों के लिए टेस्ट किए जाते हैं। अगर कोई पायलट या एविएशन कर्मी टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, तो नियमों के मुताबिक उसे तुरंत सुरक्षा-संवेदनशील ड्यूटी से हटाकर पुनर्वास केंद्र भेजा जाता है, और दोबारा पॉजिटिव आने पर लाइसेंस रद्द किए जाने का भी प्रावधान है।

AAIB की जांच भी जारी

इसी बीच विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) इस पूरी घटना की विस्तृत तकनीकी और मेडिकल जांच कर रहा है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि ऊंचाई में हुई गिरावट के पीछे तकनीकी खराबी की कितनी भूमिका थी और इसमें पायलट की स्थिति का कोई सीधा संबंध था या नहीं। एयरलाइन प्रबंधन का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण स्क्रीनिंग जैसा एहतियाती कदम जरूरी माना गया।

आगे क्या

एयर इंडिया के इस फैसले को विमानन सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा और सख्त कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस व्यापक स्क्रीनिंग के नतीजे क्या सामने आते हैं, और क्या इसके आधार पर एयरलाइन या नागर विमानन नियामक भविष्य के लिए स्थायी नीतिगत बदलाव भी करते हैं।

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