असम बाढ़ 2026: मरने वालों की संख्या 87 पहुंची, अब भी लाखों लोग प्रभावित
पूर्वोत्तर भारत के असम राज्य में बाढ़ का कहर अभी भी थमा नहीं है। राज्य में इस साल की बाढ़ ने अब तक भारी तबाही मचाई है, और ताजा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मरने वालों की संख्या बढ़कर 87 हो गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि कई जिलों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे घटने लगा है, लेकिन अब भी करीब 1.3 लाख लोग इस आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हैं।
किन जिलों में सबसे ज्यादा तबाही
असम सरकार के आधिकारिक बाढ़ बुलेटिन के अनुसार गोलाघाट, जोरहाट, शिवसागर, चराइदेव और धेमाजी जैसे जिले इस बार सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इन जिलों की 335 से ज्यादा गांव अब भी बाढ़ के पानी से जूझ रहे हैं। खास बात यह है कि यह इलाके आमतौर पर बाढ़ के लिए ज्यादा संवेदनशील नहीं माने जाते, लेकिन इस बार असामान्य हालात के चलते यहां भी पानी भर गया। रिपोर्टों के मुताबिक शिवसागर जिले में हाल ही में तीन और लोगों की मौत हुई है, जबकि दो लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बाढ़ के पानी ने करीब 15,422 हेक्टेयर खेती की जमीन को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
आखिर इस बार बाढ़ इतनी असामान्य क्यों रही
विशेषज्ञों के मुताबिक इस साल की बाढ़ पिछले कई सालों की तुलना में कुछ अलग वजहों से आई है। सामान्य तौर पर असम में बारिश सामान्य से कम भी रही, लेकिन ऊपरी इलाकों में हुए अचानक और तेज बादल फटने की घटनाओं (क्लाउडबर्स्ट) की वजह से दिखौ और धनसिरी जैसी सहायक नदियों में अचानक भारी उछाल आ गया। असम फाउंडेशन जैसी राहत संस्थाओं के मुताबिक 19 जुलाई को हुए एक बड़े क्लाउडबर्स्ट ने ऊपरी असम में पानी की एक विशाल दीवार जैसी स्थिति पैदा कर दी, जिससे दिखौ नदी अपने अधिकतम बाढ़ स्तर को भी पार कर गई। यह बाढ़ का पानी ब्रह्मपुत्र नदी के अपने चरम पर पहुंचने से पहले ही आ गया, जिससे एक खतरनाक स्थिति बन गई और पानी उन इलाकों में भी घुस गया जो सामान्यतः बाढ़ से अछूते रहते हैं। भूगोलविदों का कहना है कि असम की करीब 40 प्रतिशत भूमि पहले से ही बाढ़ के खतरे की जद में मानी जाती है, और वनों की कटाई, अवैध खनन, आर्द्रभूमि के नुकसान तथा अनियोजित निर्माण जैसी मानवीय गतिविधियां हर साल इस समस्या को और गंभीर बनाती जा रही हैं।
राहत कार्य और सरकार की भूमिका
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने खुद बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया है। उन्होंने केंद्र सरकार का आभार जताते हुए बताया कि राज्य आपदा राहत कोष (SDRF) के तहत 379.35 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, साथ ही केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीमों को भी समय पर राज्य में भेजा गया है। राज्य सरकार ने बाढ़ में जान गंवाने वाले पशुओं के मालिकों के लिए भी मुआवजे का ऐलान किया है, जिसके तहत हर गाय के नुकसान पर 37,500 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है, साथ ही बकरी और मुर्गी पालकों को भी अलग से मुआवजा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में बाढ़ प्रबंधन से जुड़ी 263 परियोजनाओं के लिए मार्च 2026 तक कुल 2,537 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सके।
आगे मौसम को लेकर क्या है चेतावनी
मौसम विभाग (IMD) ने आने वाले दिनों के लिए भी चिंता बढ़ाने वाली चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश और मेघालय में भारी से बेहद भारी बारिश और गरज-चमक की संभावना है, जिसका सीधा असर असम के उन जिलों पर पड़ सकता है जो इन दोनों राज्यों की सीमा से लगे हैं। ऐसे में प्रशासन को आशंका है कि आने वाले दिनों में फिर से बाढ़ की स्थिति और बिगड़ सकती है। राहत एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन दोनों ही स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए हैं, ताकि किसी भी नई आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
इस पूरे संकट ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर असम में हर साल आने वाली इस बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान कब निकलेगा, और भविष्य में इस तरह की जनहानि को रोकने के लिए किस तरह के दीर्घकालिक उपाय अपनाए जाने चाहिए।




