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असम में बाढ़ का कहर: मृतकों की संख्या 100 पार, 7 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

असम में बाढ़ की स्थिति सोमवार को और गंभीर हो गई, जब रातभर में दो और मौतों के साथ मृतकों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई। पिछले महीने शुरू हुई इस बाढ़ ने अब तक 7 लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया है, और चरम पर करीब 3 लाख लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी। ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। सबसे ज्यादा नुकसान डेयरी किसानों को हुआ है, जिन्होंने अपना सारा पशुधन खो दिया। सरकार ने करीब 50,000 प्रभावित लोगों को अंतरिम मुआवजा दे दिया है, और पुनर्वास का काम जारी है।

India Junction News Desk
11/8/2026
असम में बाढ़ का कहर: मृतकों की संख्या 100 पार, 7 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

असम में बाढ़ की स्थिति सोमवार को और गंभीर हो गई, जब रातभर में दो और लोगों की मौत के साथ मृतकों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई। पिछले महीने शुरू हुई इस बाढ़ ने अब तक 7 लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया है, और करीब 3 लाख लोगों को सरकारी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। ब्रह्मपुत्र समेत राज्य की कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

ब्रह्मपुत्र नदी का कहर

चीन के तिब्बत क्षेत्र से निकलकर असम में करीब 900 किलोमीटर बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी, एशिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक है। लगातार हो रही भारी मानसूनी बारिश के चलते यह नदी और इसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे गांव के गांव जलमग्न हो गए हैं, घर बह गए हैं और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक कई नदियां अब भी खतरनाक स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे संवेदनशील इलाकों में फिर से बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है।

लाखों लोग राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर

बीते महीने शुरू हुई इस बाढ़ ने अब तक 7 लाख से ज्यादा लोगों को विस्थापित किया है और बड़े पैमाने पर खेतिहर जमीन को जलमग्न कर दिया है, साथ ही सड़कों और अन्य स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि पानी घटने के साथ कई निवासी अपने घरों को लौटना शुरू कर चुके हैं, लेकिन अधिकारियों के मुताबिक अब भी कम से कम 49,000 बाढ़ प्रभावित लोग 125 राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रह रहे हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक बाढ़ के चरम पर करीब 3 लाख लोगों को सरकारी राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी थी।

डेयरी किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों में डेयरी किसान शामिल हैं, जिन्होंने अपने सभी पशुधन खो दिए हैं और अब उन्हें अपनी जिंदगी नए सिरे से शुरू करनी पड़ रही है। राहत सामग्री के तौर पर छत के टिन और अन्य निर्माण सामग्री लोगों तक पहुंचनी शुरू हो गई है। असम के कृषि एवं सिंचाई मंत्री पीयूष हजारिका ने एक समीक्षा बैठक के बाद बताया कि अधिकारियों को जल्द से जल्द नुकसान का आकलन पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सरकार पुनर्वास के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर सके। उन्होंने बताया कि करीब 50,000 प्रभावित लोगों को पहले ही अंतरिम आर्थिक मुआवजा दिया जा चुका है।

हर साल का सिलसिला, लेकिन बढ़ती जा रही तीव्रता

गौरतलब है कि असम में हर साल मानसून के मौसम में बाढ़ आना एक आम बात है, जहां उफनती नदियां बड़े इलाकों को जलमग्न कर देती हैं और हजारों लोगों को विस्थापित करती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानव-जनित जलवायु परिवर्तन दक्षिण एशिया के मानसून को और तीव्र बना रहा है, जो परंपरागत रूप से जून से सितंबर और फिर अक्टूबर से दिसंबर तक चलता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अब बारिश पहले जैसी अनुमानित नहीं रही, बल्कि यह अनियमित रूप से आती है, जिसमें कम समय में भारी मात्रा में पानी बरसता है, उसके बाद लंबे समय तक सूखा रहता है।

सरकार की राहत और पुनर्वास की तैयारी

राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत और पुनर्वास कार्यों को तेज करने का भरोसा दिलाया है। नुकसान के आकलन के आधार पर प्रभावित परिवारों को वित्तीय सहायता देने की प्रक्रिया जारी है, और राहत सामग्री का वितरण भी लगातार किया जा रहा है। हालांकि नदियों का जलस्तर अब भी खतरे के निशान से ऊपर होने की वजह से प्रशासन के सामने आगे भी चुनौतियां बरकरार हैं, और संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बनाए रखी जा रही है।

आगे क्या

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक जब तक नदियों का जलस्तर पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता, तब तक खतरा टला नहीं माना जा सकता। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम विभाग के पूर्वानुमान और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जाएगी। फिलहाल राज्य सरकार का पूरा ध्यान प्रभावित लोगों के पुनर्वास और नुकसान की भरपाई पर केंद्रित है, ताकि बाढ़ से तबाह हुए परिवार जल्द से जल्द अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें।

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