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बेंगलुरु ट्रिपल मर्डर केस: आरोपी ने 6 महीने तक AI चैटबॉट से ली हत्या की सलाह

बेंगलुरु में लिव-इन पार्टनर के माता-पिता और बहन की हत्या के मामले में पुलिस का दावा है कि आरोपी ने छह महीने तक AI चैटबॉट से हत्या की योजना और सबूत मिटाने के तरीके पूछे।

India Junction News Desk
3/8/2026
बेंगलुरु ट्रिपल मर्डर केस: आरोपी ने 6 महीने तक AI चैटबॉट से ली हत्या की सलाह

बेंगलुरु से एक चौंकाने वाला और भारत का शायद पहला "हाई-टेक मर्डर" केस सामने आया है, जिसमें एक आरोपी ने कथित तौर पर हत्या की पूरी योजना बनाने के लिए महीनों तक एक AI चैटबॉट का सहारा लिया। पुलिस के मुताबिक यह मामला इतना अनोखा है कि जांच अधिकारियों ने एक समय पर AI चैटबॉट को ही मामले में "सह-आरोपी" के तौर पर शामिल करने पर विचार किया था, हालांकि बाद में पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी AI टूल पर कानूनी तौर पर कोई जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।

क्या है पूरा मामला

यह घटना बेंगलुरु के केआर पुरम इलाके के सीगेहल्ली में स्थित एक किराए के अपार्टमेंट में 22 जून 2026 को हुई थी। पुलिस के अनुसार आरोपी केनेथ (25) ने अपनी लिव-इन पार्टनर श्वेता (24) के माता-पिता सोमासुंदर (52) और मुथुलक्ष्मी (48) के साथ-साथ श्वेता की छोटी बहन सुप्रिया की चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी। जांच में सामने आया कि इस पूरी वारदात को अंजाम देने से पहले केनेथ करीब छह महीने तक गूगल के जेमिनी नाम के AI चैटबॉट से लगातार सलाह लेता रहा। पुलिस सूत्रों के मुताबिक घटना के तुरंत बाद श्वेता और केनेथ फरार हो गए थे, लेकिन कुछ दिनों बाद दोनों को पुडुचेरी से अलग-अलग गिरफ्तार कर लिया गया।

हत्या की योजना में AI चैटबॉट का इस्तेमाल कैसे हुआ

जांच अधिकारियों का कहना है कि केनेथ ने AI चैटबॉट से सीधे तौर पर "हत्या कैसे करें" जैसे सवाल पूछने के बजाय घुमा-फिराकर काल्पनिक सवालों के जरिए जानकारी हासिल की। पुलिस के मुताबिक इनमें हत्या के तरीकों, शव को ठिकाने लगाने के उपायों और खून के धब्बे मिटाने के तरीकों से जुड़े सवाल शामिल थे। पूछताछ के दौरान केनेथ ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि शवों को ठिकाने लगाने के लिए लोहे की भट्टी इस्तेमाल करने का विचार भी उसे AI चैटबॉट से बातचीत के दौरान ही आया था। दिलचस्प बात यह है कि यह भट्टी मूल रूप से केनेथ ने अपने क्लाउड किचन बिजनेस के लिए बनवाई थी, लेकिन बाद में कथित तौर पर उसने इसका इस्तेमाल दूसरे मकसद के लिए करने की योजना बनाई। इस चौंकाने वाले खुलासे के बाद बेंगलुरु पुलिस ने AI चैटबॉट की पैरेंट कंपनी गूगल को पत्र लिखकर आरोपी की पूरी चैट हिस्ट्री मांगी है, ताकि डिजिटल सबूतों के आधार पर मामले को और मजबूती से साबित किया जा सके।

हत्या के पीछे की वजह क्या मानी जा रही है

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरी वारदात के पीछे मुख्य वजह पैसों को लेकर हुआ विवाद और पारिवारिक रिश्तों में आई खटास बताई जा रही है। जांच के मुताबिक श्वेता ने केनेथ के प्रस्तावित क्लाउड किचन बिजनेस के लिए अपने माता-पिता से करीब 50 लाख रुपये उधार लिए थे। जैसे-जैसे पैसा खत्म होता गया और वापसी का दबाव बढ़ता गया, केनेथ कथित तौर पर श्वेता के परिवार को अपने रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट मानने लगा। इसके अलावा जांचकर्ताओं का यह भी कहना है कि श्वेता का अपनी मां मुथुलक्ष्मी के साथ रिश्ता पहले से ही तनावपूर्ण था, और वह अक्सर महसूस करती थी कि उसकी मां उसकी जिंदगी पर हावी होने की कोशिश करती है। पुलिस मनोवैज्ञानिक आकलन के आधार पर यह भी बता रही है कि दोनों आरोपियों में गहरी सामाजिक तन्हाई (सोशल आइसोलेशन) के लक्षण पाए गए हैं, जिसने इस पूरी घटना को और गंभीर बना दिया।

तकनीक के दुरुपयोग पर उठे बड़े सवाल

इस पूरे मामले ने आधुनिक तकनीक और AI टूल्स के दुरुपयोग को लेकर एक नई और गंभीर बहस छेड़ दी है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला दिखाता है कि किस तरह आम इस्तेमाल में आने वाले AI चैटबॉट का दुरुपयोग गंभीर अपराधों की योजना बनाने में किया जा सकता है, भले ही यूज़र सीधे तौर पर आपत्तिजनक सवाल न पूछे। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस तरह के मामलों में भविष्य में जांच और सबूत जुटाने के लिए किस तरह की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के दायरे में है, और अदालत में पेश किए जाने वाले सभी डिजिटल सबूतों की विस्तार से जांच की जाएगी।

यह घटना समाज को यह भी याद दिलाती है कि पारिवारिक विवादों और वित्तीय दबावों को समय रहते सुलझाना कितना जरूरी है, ताकि हालात इतने गंभीर मोड़ तक न पहुंचें।

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