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बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, लंबी बीमारी के बाद तोड़ा दम; मायावती ने जताया शोक

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उत्तर प्रदेश विधानसभा में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त 2026 की शाम लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे बलिया की रसड़ा सीट से पांच बार विधायक रहे और 2012, 2017 व 2022 में लगातार जीत दर्ज की। उनके निधन पर बसपा प्रमुख मायावती ने गहरा शोक जताते हुए लखनऊ पहुंचकर पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की और परिवार को सांत्वना दी। सामाजिक सेवा के लिए 'गरीबों का मसीहा' कहलाने वाले सिंह का निधन पूर्वांचल में पार्टी के लिए बड़ी क्षति माना जा रहा है।

India Junction News Desk
7/8/2026
बसपा के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का निधन, लंबी बीमारी के बाद तोड़ा दम; मायावती ने जताया शोक

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उत्तर प्रदेश विधानसभा में इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम को निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। बलिया की रसड़ा सीट से पांच बार विधायक रह चुके सिंह के निधन पर बसपा प्रमुख मायावती समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

लंबी बीमारी के बाद हुआ निधन

उमाशंकर सिंह पिछले काफी समय से अपनी बीमारी का इलाज करा रहे थे। पार्टी नेताओं के मुताबिक वे मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जिसका उपचार लंबे समय से चल रहा था। बुधवार शाम इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर मिलते ही राजनीतिक हलकों में शोक की लहर दौड़ गई, और देशभर से नेताओं ने संवेदनाएं व्यक्त कीं।

मायावती ने जताया गहरा शोक

बसपा सुप्रीमो और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोशल मीडिया मंच X पर एक पोस्ट के जरिए अपना दुख जाहिर किया। उन्होंने लिखा कि रसड़ा सीट से लोकप्रिय, ईमानदार और पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित विधायक उमाशंकर सिंह के निधन की खबर बेहद दुखद है। मायावती ने बताया कि उन्हें यह जानकारी विधायक के बेटे से लगातार संपर्क में रहने के दौरान मिली। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरी पार्टी उनके परिवार के साथ खड़ी है, और परिवार को हिम्मत के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

इसके अलावा मायावती लखनऊ पहुंचकर उमाशंकर सिंह के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित करने भी गईं, जहां उन्होंने परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी।

पूर्वांचल की राजनीति में रहा अहम स्थान

उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के खानवार गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। सरकारी स्कूलों से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने बलिया के सतीश चंद्र कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से उन्होंने अपने छात्र राजनीति की शुरुआत की। 1991 में उन्होंने कॉलेज के छात्र संघ चुनाव में रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी।

राजनीति में उनका बड़ा कदम 2012 में आया, जब उन्होंने रसड़ा सीट से बसपा के टिकट पर समाजवादी पार्टी के संग्राम सिंह यादव को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वे लगातार 2017 और 2022 के चुनावों में भी इसी सीट से जीत दर्ज करते रहे, और कुल मिलाकर पांच बार विधायक चुने गए। मौजूदा उत्तर प्रदेश विधानसभा में वे बसपा के इकलौते विधायक थे, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में पार्टी की मौजूदगी बनाए रखने में उनकी भूमिका और भी अहम हो जाती थी।

जमीनी जुड़ाव और समाजसेवा के लिए जाने जाते थे

उमाशंकर सिंह को उनके क्षेत्र में आम लोगों से गहरे जुड़ाव और सहज उपलब्धता के लिए जाना जाता था। उन्हें अक्सर 'गरीबों का मसीहा' कहकर संबोधित किया जाता रहा। 2016 में उन्होंने सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के मकसद से 351 जोड़ों की सामूहिक शादी का आयोजन कराया था, जिसकी क्षेत्र में खूब चर्चा हुई थी।

विभिन्न दलों के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि

उमाशंकर सिंह के निधन पर सिर्फ बसपा ही नहीं, बल्कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी शोक व्यक्त किया है। कई नेताओं ने उन्हें एक सुलभ जनप्रतिनिधि के रूप में याद किया, जिनका अपने क्षेत्र की जनता से गहरा और लंबे समय से जुड़ाव रहा। उनके अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों, पार्टी नेताओं, समर्थकों और उत्तर प्रदेश भर से जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।

पार्टी के लिए बड़ी क्षति

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक उमाशंकर सिंह का निधन बसपा के लिए, खासकर पूर्वांचल क्षेत्र में, एक बड़ी क्षति है। ऐसे समय में जब बसपा को राज्य के कई हिस्सों में चुनावी नुकसान का सामना करना पड़ा है, रसड़ा सीट पार्टी के लिए एक मजबूत गढ़ बनी रही, और इसका श्रेय काफी हद तक सिंह के व्यक्तिगत जनसंपर्क को दिया जाता है। अब पार्टी के सामने यह चुनौती होगी कि वह इस सीट पर अपनी पकड़ कैसे बनाए रखती है।

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