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उपचुनाव 2026: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में कौन जीता? पूरे नतीजे यहां जानें

3 अगस्त 2026 को बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आए। बांकीपुर में जन सुराज के प्रशांत किशोर ने भाजपा को 19,246 वोटों से हराया — यह उनकी पार्टी की पहली बड़ी जीत थी। दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने भाजपा को 6,016 वोटों से मात दी। वहीं मांजलपुर में भाजपा के सतेंद्रभाई पटेल ने कांग्रेस को 30,630 वोटों के बड़े अंतर से हराकर अपना गढ़ बचाया। कुल मिलाकर नतीजे बंटे हुए रहे — हर पार्टी को एक-एक सीट पर जीत मिली।

India Junction News Desk
3/8/2026
उपचुनाव 2026: बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर में कौन जीता? पूरे नतीजे यहां जानें

संक्षेप में: 3 अगस्त 2026 को बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों — बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर — पर हुए उपचुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं। जन सुराज, कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट पर जीत मिली है, जिससे नतीजे राजनीतिक रूप से बंटे हुए माने जा रहे हैं।

तीन राज्यों में उपचुनाव, तीन अलग-अलग नतीजे

सोमवार, 3 अगस्त 2026 को देश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आए। ये सीटें अलग-अलग राज्यों — बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात — से थीं, और तीनों जगह वोटों की गिनती सुबह शुरू होकर शाम तक चली। इन नतीजों को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि तीनों सीटों पर मुकाबला कांटे का था और नतीजे किसी एक पार्टी के पक्ष में एकतरफा नहीं गए।

बिहार की बांकीपुर सीट, मध्य प्रदेश की दतिया सीट और गुजरात की मांजलपुर सीट — तीनों जगह अलग-अलग वजहों से सीटें खाली हुई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उपचुनाव कराने का फैसला लिया था।

बांकीपुर: प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की बड़ी जीत

बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा चर्चा रही, क्योंकि यह जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर का पहला चुनावी मुकाबला था। यह सीट भाजपा के नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।

31 राउंड की मतगणना के बाद प्रशांत किशोर ने भाजपा उम्मीदवार को करीब 19,246 वोटों के अंतर से हरा दिया। गिनती के दौरान भाजपा शुरुआती दौर में आगे थी, लेकिन बाद के राउंड में जन सुराज ने बढ़त बना ली और अंत तक इसे बरकरार रखा। मतगणना के बीच ही भाजपा ने हार स्वीकार कर ली थी। इस जीत के बाद जन सुराज कार्यकर्ताओं ने पटना में जश्न मनाया, और पार्टी के लिए यह नतीजा राजनीतिक रूप से बड़ा माना जा रहा है क्योंकि यह पार्टी की पहली बड़ी चुनावी उपलब्धि है।

दतिया: कांग्रेस की वापसी, भाजपा को झटका

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को करीब 6,016 वोटों से हराया। शुरुआती राउंड में मुकाबला नजदीकी रहा, लेकिन चौथे राउंड के बाद से कांग्रेस लगातार बढ़त बनाए रही और यह बढ़त अंत तक कायम रही।

गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा को हराया था, इसलिए दतिया सीट पहले से ही कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती रही है। इस जीत के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भोपाल में मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की।

मांजलपुर: भाजपा ने बचाई अपनी परंपरागत सीट

गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, और यहां भाजपा उम्मीदवार सतेंद्रभाई पटेल (सतीश पटेल) ने कांग्रेस के भिखाभाई रबारी को करीब 30,630 वोटों के बड़े अंतर से हराया। यह सीट भाजपा विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद खाली हुई थी।

20 राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद भाजपा ने इस सीट पर अपनी पकड़ बरकरार रखी, जो पार्टी के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है, खासकर तब जब अन्य दो सीटों पर उसे नुकसान उठाना पड़ा।

नतीजों के मायने

इन तीन सीटों के नतीजे इस बात का संकेत हैं कि उपचुनावों में स्थानीय मुद्दे और उम्मीदवार की छवि बड़ी भूमिका निभाते हैं। जहां गुजरात में भाजपा ने अपना परंपरागत गढ़ बचाया, वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस ने वापसी की और बिहार में एक नई पार्टी जन सुराज ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आने वाले समय में इन नतीजों का असर संबंधित राज्यों की राजनीति पर देखा सकता है।

आगे क्या असर पड़ सकता है

बिहार में प्रशांत किशोर की जीत को खासतौर पर अहम माना जा रहा है, क्योंकि जन सुराज पार्टी अभी अपेक्षाकृत नई है और यह उसकी पहली बड़ी चुनावी परीक्षा थी। इस जीत से पार्टी को आने वाले चुनावों में अपनी रणनीति और संगठन को और मजबूत करने का हौसला मिलेगा। दूसरी ओर, भाजपा के लिए यह हार आत्ममंथन का विषय बन सकती है, खासकर बिहार जैसे राज्य में जहां आने वाले समय में और भी चुनावी मुकाबले होने हैं।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की जीत पार्टी के लिए राहत की खबर है, क्योंकि पिछले कुछ समय से राज्य में पार्टी संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही थी। दतिया सीट पर लगातार दूसरी बार जीत हासिल करने से कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व का आत्मविश्वास बढ़ेगा, और पार्टी इसे आगामी चुनावों के लिए सकारात्मक संकेत के तौर पर देख सकती है।

गुजरात में भाजपा की जीत कोई हैरानी की बात नहीं मानी जा रही, क्योंकि मांजलपुर सीट लंबे समय से पार्टी का मजबूत गढ़ रही है। फिर भी, बड़े अंतर से मिली यह जीत पार्टी के लिए संतोषजनक है, खासकर तब जब देश के अन्य हिस्सों में उसे उपचुनावों में मिश्रित नतीजों का सामना करना पड़ा है।

कुल मिलाकर, इन तीन उपचुनावों के नतीजे दिखाते हैं कि भारतीय राजनीति में कोई भी एक पार्टी हर जगह एकतरफा बढ़त नहीं बना पा रही, और मतदाता हर सीट पर स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अपना फैसला कर रहे हैं।

सकता है। जा सकता है।

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