सरकार चाहती है कि युवा केवल नौकरी न ढूंढें बल्कि खुद नौकरी देने वाले उद्यमी बनें। PMFME Scheme के जरिए अब उन्हें बाजार और नई तकनीक की मदद भी मिलेगी।
24 अगस्त, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना यानी PMFME Scheme के जरिए सरकार देश के युवा उद्यमियों और छोटे खाद्य कारोबारियों की मदद कर रही है। चिराग पासवान के अनुसार, इस योजना में केवल पैसों की मदद ही नहीं दी जा रही, बल्कि उद्यमियों को उनके सामान की पैकिंग, नई तकनीक, ब्रांड बनाने और बाजार तक पहुंचने में भी पूरा साथ दिया जा रहा है। सरकार का मकसद इन छोटे कारोबारियों को इतना मजबूत बनाना है कि वे अपने इलाके में रोजगार पैदा कर सकें और अपने उत्पादों को देश और विदेश के बाजारों तक पहुंचा सकें।
चिराग पासवान ने यह बात नई दिल्ली में हुए PMFME सम्मेलन में कही। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस योजना से दो लाख लोगों को जोड़ने का लक्ष्य रखा था और यह लक्ष्य कुछ हफ्ते पहले ही पूरा हो चुका है। PMFME Scheme के माध्यम से देश के छोटे खाद्य कारोबारों को आर्थिक मदद के साथ-साथ तकनीकी और बाजार से जुड़ी सहायता भी मिल रही है। छोटे उद्यमियों को अपने सामान की पैकिंग, ब्रांडिंग और बिक्री के लिए बेहतर जगह मिल सके, इसके लिए योजना में APEDA और ONDC जैसी संस्थाओं की भी मदद ली जा रही है।
युवाओं को नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनाने पर जोर
चिराग पासवान ने कहा कि PMFME Scheme प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उसी सपने को पूरा कर रही है, जिसमें देश के युवाओं को सिर्फ नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार पैदा करने वाला उद्यमी बनाना है। चिराग पासवान का मानना है कि छोटे खाद्य प्रसंस्करण कारोबार देश की स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुधारने और गांवों में काम के नए मौके पैदा करने में बहुत बड़ा रोल निभा सकते हैं। सरकारी आंकड़ों को देखें तो PMFME Scheme के तहत दो लाख से ज्यादा छोटी खाद्य इकाइयों को लोन से जुड़ी मदद मिल चुकी है। इस योजना में अब तक 20,300 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो चुका है और इससे करीब 11 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के मौके पैदा हुए हैं। खास बात यह है कि इस योजना का फायदा उठाने वाले लगभग 90 प्रतिशत लोग पहली बार अपना काम शुरू करने वाले उद्यमी हैं, और करीब 44 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। इससे पता चलता है कि महिला उद्यमिता को भी काफी बढ़ावा मिल रहा है।
PMFME Scheme के तहत स्वयं सहायता समूहों को भी शुरुआती पूंजी यानी Seed Capital दी जा रही है। अब तक 4.18 लाख से ज्यादा SHG सदस्यों को यह सहायता मिल चुकी है। इसके अलावा, 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 Common Incubation Centres को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 32 केंद्र काम करना शुरू भी कर चुके हैं। योजना के जरिए 1.76 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रेनिंग भी दी गई है, जिनमें महिलाओं की संख्या करीब 77 प्रतिशत है।
मखाना और बिहार के खाद्य उद्योग पर भी चिराग पासवान का जोर
चिराग पासवान ने बिहार के मखाना उद्योग पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि मखाना उनके लिए बहुत खास है, क्योंकि बिहार ही देश में मखाना उगाने का सबसे बड़ा केंद्र है। केंद्र सरकार द्वारा मखाना बोर्ड बनाना एक बहुत अच्छा कदम है। मखाना बोर्ड का काम मखाने की खेती से लेकर उसकी प्रोसेसिंग, मार्केटिंग और निर्यात तक की पूरी प्रक्रिया को मजबूत करना है। इससे किसानों और मखाना कारोबारियों को अच्छी तकनीक, ट्रेनिंग, बढ़िया बीज और बाजार की सुविधाएं मिल सकेंगी। PMFME Scheme में One District One Product यानी ODOP पहल पर भी काफी ध्यान दिया जा रहा है। इसके जरिए अलग-अलग जिलों के खास और स्थानीय खाद्य उत्पादों को पहचान दिलाने की कोशिश की जा रही है, ताकि उनकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग बढ़ सके। सरकार चाहती है कि स्थानीय सामान बड़े बाजारों तक पहुंचे और छोटे कारोबारियों की कमाई और मुकाबला करने की ताकत बढ़े।
फिलहाल PMFME Scheme के अगले चरण को लेकर भी तैयारी चल रही है। खबरों के मुताबिक, योजना को आगे बढ़ाने पर विचार हो रहा है, जिसमें अगले पांच सालों के लिए विस्तार और लोन पर मिलने वाली सब्सिडी में बदलाव जैसे सुझाव शामिल हैं। साथ ही, महिला उद्यमियों और पहाड़ी इलाकों में काम करने वाली इकाइयों को ज्यादा प्राथमिकता देने की बात भी चल रही है। कुल मिलाकर, PMFME Scheme के जरिए सरकार छोटे खाद्य कारोबारियों, युवा उद्यमियों, महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों को मुख्यधारा से जोड़ने और उनके कारोबार को बड़े बाजारों तक ले जाने की कोशिश कर रही है। चिराग पासवान का कहना है कि इन कोशिशों से आने वाले समय में स्थानीय उत्पादों को देशभर और दुनिया भर में पहचान मिलेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।




