जंतर-मंतर आंदोलन की कामयाबी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब देशभर में युवाओं तक पहुंचने के लिए 'नेशनवाइड लिसनिंग टूर' शुरू करने जा रही है। इसकी रूपरेखा तय करने के लिए 5 और 6 अगस्त को महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में दो दिवसीय रणनीतिक बैठक होगी, जिसमें पार्टी के संस्थापक अभिजीत डिपके समेत मुख्य पदाधिकारी शामिल होंगे।
जंतर-मंतर आंदोलन से मिली पहचान
कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत मई 2026 में डिजिटल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट अभिजीत डिपके ने एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक अभियान के तौर पर की थी। इसका नाम भारत के चीफ जस्टिस सूर्य कांत की उस टिप्पणी से प्रेरित है, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों की तुलना 'कॉकरोच' और 'परजीवियों' से की थी। इस बयान पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई थी, और उसी के जवाब में यह पार्टी अस्तित्व में आई।
जून से जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में एक महीने से ज्यादा लंबा आंदोलन चला, जिसमें ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया जैसे वामपंथी छात्र संगठन भी शामिल हुए। इस आंदोलन की मुख्य मांग थी 2026 के NEET पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। लंबे विरोध प्रदर्शन और सरकार से बातचीत के बाद 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया, जिसे CJP और आंदोलन में शामिल छात्रों की बड़ी जीत माना गया।
अब आगे की रणनीति पर मंथन
आंदोलन की सफलता के बाद CJP के कोर सदस्यों को कुछ समय अपने परिवार के साथ बिताने और स्थानीय छात्रों व वालंटियर्स से बातचीत कर उनके सुझाव लेने को कहा गया था। अब इन्हीं सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय करने के लिए 5 और 6 अगस्त को छत्रपति संभाजीनगर में डिपके के घर पर बैठक होगी। इसमें पार्टी के संस्थापक, प्रवक्ता और संगठनात्मक नेतृत्व शामिल रहेंगे। इस दौरान पिछले महीने जंतर-मंतर आंदोलन में लगे लगभग पचास कोर वालंटियर्स के अनुभव और राय पर भी चर्चा होगी।
बैठक के बाद CJP एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगे की रणनीति की जानकारी सार्वजनिक करेगी। सूत्रों के मुताबिक इसी बैठक में पार्टी अपने 'नेशनवाइड लिसनिंग टूर' की पूरी रूपरेखा भी तय करेगी, जिसके तहत देशभर में मौजूद वालंटियर्स के जरिए युवाओं की उम्मीदों और जरूरतों को समझा जाएगा।
राजनीतिक पार्टी बनने से किया इनकार
इन तमाम गतिविधियों के बीच सबसे अहम बयान खुद CJP संस्थापक अभिजीत डिपके की तरफ से आया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि संगठन का राजनीतिक पार्टी बनने का कोई इरादा नहीं है। डिपके ने कहा कि जिस तरह ED और CBI के जरिए राजनीतिक दलों को तोड़ा जा रहा है, चुनावों में वोट डिलीट हो रहे हैं, और लोगों का न्यायपालिका, चुनाव प्रणाली और मीडिया तक से भरोसा उठ रहा है, ऐसे हालात में एक और राजनीतिक पार्टी बनाने का कोई मतलब नहीं है।
उनका कहना है कि टीम की पूरी कोशिश यही है कि युवाओं की उम्मीदों को सार्थक कार्रवाई में बदला जाए, न कि उसे पारंपरिक राजनीति की भेंट चढ़ाया जाए।
आगे क्या होगा
CJP ने कहा है कि आने वाले दिनों में वह लिसनिंग टूर का पूरा शेड्यूल सार्वजनिक करेगी। पार्टी का यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि जंतर-मंतर आंदोलन के बाद देशभर के युवाओं में इस संगठन को लेकर उत्सुकता और उम्मीद दोनों बढ़ी हैं। अब देखना यह होगा कि छत्रपति संभाजीनगर की यह बैठक CJP को किस नई दिशा में ले जाती है, और लिसनिंग टूर के जरिए संगठन युवाओं की आवाज को किस तरह आगे बढ़ाता है।
संगठन के सामने चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि CJP की लोकप्रियता जंतर-मंतर आंदोलन के बाद तेजी से बढ़ी है, लेकिन संगठन के सामने आगे की राह इतनी आसान भी नहीं दिख रही। एक तरफ जहां देशभर के युवा वर्ग में इस पार्टी को लेकर उत्साह है, वहीं दूसरी तरफ कुछ हलकों से संगठन की कार्यशैली और पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठाए जा रहे हैं। हाल ही में एक RTI कार्यकर्ता ने संस्थापक अभिजीत डिपके की पारिवारिक संपत्ति की जांच की मांग भी की थी, जिससे संगठन पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
इसके अलावा, बड़े पैमाने पर वालंटियर नेटवर्क को संभालना, देशभर में समन्वय बनाए रखना और आंदोलन की मूल भावना को बरकरार रखते हुए इसे एक स्थायी और संगठित रूप देना भी CJP के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। पार्टी के नेतृत्व ने साफ किया है कि वे जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहते, बल्कि पहले जमीनी स्तर पर युवाओं की राय जानने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि CJP अपने वालंटियर नेटवर्क और जमीनी जुड़ाव को बनाए रखने में कामयाब रहती है, तो यह संगठन आने वाले समय में युवाओं की आवाज बनकर उभर सकता है। दूसरी ओर, अगर संगठन में आंतरिक मतभेद या नेतृत्व को लेकर सवाल बढ़ते हैं, तो इसका असर आंदोलन की गति पर भी पड़ सकता है। ऐसे में 5 और 6 अगस्त की यह बैठक सिर्फ रणनीति तय करने भर की नहीं, बल्कि CJP के भविष्य की दिशा तय करने वाली भी साबित हो सकती है।





