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IRCTC केस में लालू परिवार पर फैसला फिर टला

IRCTC होटल टेंडर मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर अदालत का फैसला एक बार फिर टल गया है। अब इस मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट 27 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगी। मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत अन्य लोगों के नाम शामिल हैं। अदालत की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसी दौरान आरोप तय करने को लेकर आगे की कार्रवाई पर फैसला हो सकता है।

India Junction News Desk
14/8/2026
IRCTC केस में लालू परिवार पर फैसला फिर टला

IRCTC होटल टेंडर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर अदालत का फैसला एक बार फिर टल गया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई के बाद अब अदालत इस मामले में अपना आदेश 27 अगस्त 2026 को सुनाएगी। लंबे समय से चल रहे इस मामले में आरोप तय होने को लेकर अदालत के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।

मामला उस कथित अनियमितता से जुड़ा है, जिसमें भारतीय रेलवे के अधीन आने वाले रांची और पुरी स्थित होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका देने की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच कर चुका है। मामले में लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी और बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी, उनके बेटे तेजस्वी यादव समेत कई अन्य लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है।

क्या है IRCTC होटल टेंडर मामला?

IRCTC होटल टेंडर मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे के रांची और पुरी स्थित दो होटलों के संचालन और रखरखाव का ठेका एक निजी कंपनी को दिए जाने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुई थीं। सीबीआई का आरोप है कि इन होटलों का ठेका देने के बदले जमीन से जुड़े कथित लेनदेन किए गए। जांच के दौरान डिलाइट मार्केटिंग कंपनी का नाम भी सामने आया, जिसे बाद में लारा प्रोजेक्ट्स एलएलपी के नाम से जाना गया। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि होटल टेंडर और जमीन से जुड़े लेनदेन के बीच संबंध था।

हालांकि, लालू यादव और उनके परिवार की ओर से इन आरोपों को लगातार खारिज किया गया है। आरोपियों का पक्ष रहा है कि उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से कार्रवाई की जा रही है और मामले में लगाए गए आरोपों का कोई ठोस आधार नहीं है।

प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से की जांच

सीबीआई की ओर से दर्ज मामले के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने इस पूरे प्रकरण की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से की। प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत अपनी अभियोजन शिकायत दाखिल की। इसमें लालू परिवार समेत अन्य लोगों और संबंधित कंपनियों को आरोपी बनाया गया। प्रवर्तन निदेशालय की जांच का मुख्य फोकस कथित तौर पर उन वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों पर रहा, जिनका संबंध होटल टेंडर मामले से बताया गया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कथित अनियमितताओं के जरिए आर्थिक लाभ पहुंचाया गया और बाद में उससे जुड़े लेनदेन को मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में देखा गया।

अब अदालत के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और अन्य साक्ष्य आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं या नहीं। अदालत यदि आरोप तय करने का आदेश देती है, तो मामला आगे ट्रायल की दिशा में बढ़ेगा और आरोपियों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे चलेगी।

वहीं, यदि अदालत आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाती है, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ इस स्तर पर कार्यवाही आगे बढ़ने पर असर पड़ेगा। हालांकि, आरोप तय होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं होता। दोष या निर्दोषता का अंतिम फैसला मुकदमे की पूरी प्रक्रिया के बाद अदालत द्वारा किया जाता है।

पहले भी कई बार टल चुका है फैसला

आईआरसीटीसी मामले में लालू परिवार के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर अदालत का फैसला पहले भी कई बार टल चुका है। जुलाई 2026 में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त 2026 की तारीख तय की थी। माना जा रहा था कि इस तारीख पर अदालत आरोप तय करने को लेकर अपना आदेश सुना सकती है।

हालांकि, 14 अगस्त को भी फैसला नहीं हो सका और अदालत ने अब अगली तारीख 27 अगस्त 2026 तय कर दी है। इसके साथ ही लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और मामले से जुड़े अन्य आरोपियों को एक बार फिर अदालत के अगले आदेश का इंतजार करना होगा।

लालू परिवार के लिए क्यों अहम है 27 अगस्त?

27 अगस्त की सुनवाई इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि अदालत को यह तय करना है कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए जाएं या नहीं। यदि आरोप तय होते हैं तो मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी और अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष को अदालत के सामने अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा। लालू प्रसाद यादव का परिवार पहले से ही कई कानूनी और राजनीतिक मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में आईआरसीटीसी मामले में अदालत का अगला आदेश राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर बिहार की राजनीति में आरजेडी की भूमिका को देखते हुए इस मामले की सुनवाई पर राजनीतिक हलकों की भी नजर बनी हुई है।

फिलहाल अदालत ने मामले में फैसला 27 अगस्त तक टाल दिया है। अब देखना होगा कि अगली सुनवाई में अदालत आरोप तय करने को लेकर क्या आदेश देती है और यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।

इस मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष के दावों पर आधारित हैं। आरोप तय होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। संबंधित आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा अधिकार है और मामले में अंतिम फैसला न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा।

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