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FCRA संशोधन बिल पर संसद में हंगामा: विपक्ष का 'अल्पसंख्यक विरोधी' आरोप, बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया

लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026 को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद ध्वनि मत से संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया। गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति में यह प्रस्ताव गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया, जिस पर कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सवाल उठाए। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बिल को 'अल्पसंख्यक विरोधी' करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की और सरकार पर हवाई अड्डों में जलभराव व एक्सप्रेसवे में गड्ढों को लेकर भी निशाना साधा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बिल का कोई प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। 31 सदस्यीय JPC शीतकालीन सत्र में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

India Junction News Desk
13/8/2026
FCRA संशोधन बिल पर संसद में हंगामा: विपक्ष का 'अल्पसंख्यक विरोधी' आरोप, बिल संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया

लोकसभा ने बुधवार को विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026 को विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद ध्वनि मत से संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस बिल को 'अल्पसंख्यक विरोधी' करार देते हुए इसे वापस लेने की मांग की, जबकि केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।

गृह मंत्री की अनुपस्थिति में हुई कार्यवाही

बुधवार को लोकसभा में इस बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने पेश किया, जबकि सदन की कार्यसूची में यह उल्लेख था कि यह प्रस्ताव खुद अमित शाह पेश करेंगे। इस दौरान कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने अमित शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह बिल अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने वाला है, और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। गौरतलब है कि यह बिल कार्यसूची में सुबह की सूची में शामिल नहीं था, बल्कि दोपहर 2 बजे सदन दोबारा शुरू होने से ठीक पहले सप्लीमेंट्री लिस्ट में जोड़ा गया था।

अखिलेश यादव का सीधा हमला

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा, "क्या वे सिर्फ अल्पसंख्यकों को दबाने के लिए यह संशोधन लाना चाहते हैं? क्या यह सिर्फ अपने हितों की पूर्ति के लिए है? आप हवाई अड्डे बना रहे हैं, फिर भी वे पानी से भर जाते हैं। आप एक्सप्रेसवे बना रहे हैं, फिर भी उनमें गड्ढे हैं। आप कर क्या रहे हैं?" उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, "हमें प्लेन चलाने वालों और प्रदेश चलाने वालों में समानता दिखाई देती है।" उन्होंने रिजिजू को चुनौती देते हुए कहा कि वे यह दिखाएं कि बिल का कौन सा प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है, साथ ही यह भी सवाल उठाया कि अब तक सरकार जितने भी बिल लाई है, उनमें से कौन सा अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं था।

रिजिजू का पलटवार

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा, "मैं अखिलेश जी को चुनौती देता हूं कि वे कोई ऐसा प्रावधान दिखाएं जो किसी अल्पसंख्यक के खिलाफ हो। FCRA बिल का कोई भी प्रावधान अल्पसंख्यक संस्थानों को निशाना नहीं बनाता। विपक्ष कुछ समुदायों को गुमराह करने का अभियान चला रहा है। यह देश कोई बनाना रिपब्लिक नहीं है, यहां संविधान की भावना के मुताबिक नियम-कानून होने चाहिए।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने पूरी जिम्मेदारी ली है कि बिल का कोई भी प्रावधान किसी समुदाय के खिलाफ न हो, और यह पूरी तरह देश की भलाई और सुरक्षा के लिए है।

विपक्ष के भारी विरोध के बावजूद पारित हुआ प्रस्ताव

विपक्ष के जोरदार विरोध और नारेबाजी के बावजूद बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। यह दूसरी बार है जब सरकार को इस बिल को सदन में लाने के लिए टालना पड़ा — इससे पहले यह बिल बजट सत्र में पेश किया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 31 सदस्यीय यह समिति शीतकालीन सत्र के पहले हफ्ते के आखिरी दिन अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

RSS पर भी उठे सवाल

बिल को JPC भेजे जाने के बाद विपक्ष ने एक और तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक तरफ सरकार अल्पसंख्यक संगठनों को निशाना बना रही है, वहीं दूसरी तरफ RSS को विदेशी फंडिंग मिलती रहती है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि अगर विदेशी चंदे को लेकर नियम सख्त किए जाने हैं, तो यह सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होने चाहिए, न कि चुनिंदा तरीके से।

अन्य मुद्दों पर भी गरमाया संसद का माहौल

इसी दिन संसद में परिसीमन बिल को लेकर भी तीखी बहस देखी गई, जिसमें कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम ने दक्षिणी राज्यों को परिवार नियोजन में सफलता के लिए 'सजा' न देने की बात कही। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए, जबकि खुद अमित शाह ने कहा कि सरकार संसद में किसी भी सवाल का जवाब देने को तैयार है, लेकिन विपक्ष ही सदन को सुचारू रूप से नहीं चलने दे रहा।

आगे क्या

अब सभी की निगाहें JPC की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो शीतकालीन सत्र के दौरान पेश की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि समिति की सिफारिशों के बाद बिल के प्रावधानों में कोई बदलाव होता है या नहीं, और क्या विपक्ष अपनी आपत्तियों पर आगे भी अड़ा रहता है। फिलहाल यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर, दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।

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