केंद्र सरकार ने गेहूं से बने सामानों के निर्यात को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब गेहूं के आटे, मैदा और सूजी जैसे उत्पादों को बाहर भेजने पर लगी रोक हटा दी है। विदेश व्यापार महानिदेशालय यानी DGFT ने 24 अगस्त 2026 को अपनी नीति में बदलाव किया है और इन उत्पादों को 'Prohibited' यानी प्रतिबंधित श्रेणी से निकालकर 'Free' यानी मुक्त श्रेणी में डाल दिया है। यह नया नियम तुरंत लागू कर दिया गया है। सरकार के इस कदम से भारतीय व्यापारियों और निर्यातकों को अब गेहूं से बने इन उत्पादों को दूसरे देशों में भेजने में काफी आसानी होगी। इन उत्पादों में गेहूं का आटा, मैदा, सूजी, होलमील आटा और अन्य संबंधित आटा शामिल हैं। इन सभी सामानों को HS Code 11010000 के तहत रखा गया है।
निर्यात नीति में बड़ा बदलाव
पिछले कुछ सालों में देश में खाने-पीने की चीजों की सुरक्षा और गेहूं की कमी को देखते हुए सरकार ने गेहूं और उससे जुड़े सामानों के निर्यात पर कई पाबंदियां लगाई थीं। अगस्त 2022 में सरकार ने गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात को 'Free' से बदलकर 'Prohibited' कर दिया था। उस समय केवल कुछ खास हालातों में ही सरकार की अनुमति से निर्यात किया जा सकता था। इसके बाद साल 2026 में सरकार ने धीरे-धीरे नियमों में ढील देनी शुरू की। जनवरी 2026 में सरकार ने गेहूं के आटे और उससे जुड़े सामानों के 5 लाख मीट्रिक टन निर्यात की अनुमति दी थी। फरवरी में फिर से 5 लाख मीट्रिक टन और अधिक मात्रा को मंजूरी मिली थी। लेकिन उस समय भी इन उत्पादों को पूरी तरह से प्रतिबंधित श्रेणी से बाहर नहीं किया गया था।अब 24 अगस्त को हुए इस नए बदलाव के साथ सरकार ने नियमों को और भी आसान बना दिया है। नए नियमों के मुताबिक अब इन उत्पादों को 'Free' श्रेणी में रखा गया है, जिसका मतलब है कि अब निर्यात के लिए किसी सीमित कोटा या खास अनुमति की जरूरत नहीं होगी।
भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों को मिलेगा फायदा
सरकार के इस फैसले से भारत की आटा मिलों, खाद्य कंपनियों और निर्यात से जुड़े उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ने के नए मौके मिलेंगे। भारत में गेहूं और उससे बने सामानों का बहुत ज्यादा उत्पादन होता है। इसलिए नियमों में ढील मिलने से कंपनियां दूसरे देशों तक अपनी पहुंच बढ़ा पाएंगी। खासकर आटा, मैदा और सूजी जैसे सामानों की दुनिया भर में काफी मांग रहती है। भारतीय कंपनियां इन चीजों को खाड़ी देशों, एशिया और अफ्रीका जैसे बाजारों में भेजती हैं। निर्यात नियमों के आसान होने से व्यापारियों को वैश्विक बाजार में मुकाबला करने और नए ग्राहकों को खोजने में मदद मिलेगी।इस फैसले का असर गेहूं से जुड़े पूरे काम पर पड़ेगा। इससे किसानों से लेकर मिल मालिकों, प्रोसेसिंग यूनिट्स, पैकेजिंग कंपनियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर तक सभी को व्यापार बढ़ने की उम्मीद है।
घरेलू बाजार और कीमतों पर भी रहेगी नजर
हालांकि निर्यात की पाबंदियां हट गई हैं, लेकिन देश के अंदर के बाजार का ध्यान रखना भी जरूरी है। सरकार गेहूं और आटे की कीमतों पर नजर रखेगी, क्योंकि देश में इसकी मांग और उपलब्धता का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है। सरकार ने पहले भी गेहूं की उपलब्धता को देखते हुए निर्यात के नियमों में धीरे-धीरे बदलाव किए हैं। फरवरी 2026 में सरकार ने 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं और 5 लाख मीट्रिक टन गेहूं के उत्पादों के निर्यात को मंजूरी दी थी। उस समय सरकार का कहना था कि देश में गेहूं की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त मात्रा मौजूद है।अब आटा, मैदा और सूजी के निर्यात को पूरी तरह 'Free' करने के बाद देश और विदेश दोनों बाजारों पर इसके असर को देखा जाएगा। अगर विदेशों में मांग बढ़ती है तो भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा होगा। वहीं, देश के अंदर गेहूं और आटे के दाम स्थिर रखना सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह फैसला भारत के खेती और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए बहुत मायने रखता है। गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात की पाबंदियां हटने से भारतीय व्यापारियों को दुनिया भर में व्यापार करने का मौका मिलेगा। यह फैसला किसानों और उद्योगों के लिए नए रास्ते खोल सकता है। आने वाले समय में इस बदलाव का असर निर्यात के आंकड़ों और घरेलू कीमतों पर साफ दिखाई देगा।




