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मेटा से भिड़ी सरकार: CSAM लापरवाही और गलत अकाउंट एक्शन पर 5-6 अगस्त को बैठक

प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट रुकने के बाद भारत सरकार 5-6 अगस्त को मेटा की ग्लोबल टीम से मिलेगी। जानें CSAM लापरवाही, अकाउंट एक्शन और एल्गोरिदम को लेकर क्या सवाल उठेंगे।

India Junction News Desk
5/8/2026
मेटा से भिड़ी सरकार: CSAM लापरवाही और गलत अकाउंट एक्शन पर 5-6 अगस्त को बैठक

भारत सरकार 5 और 6 अगस्त 2026 को मेटा (Meta) के ग्लोबल टीम के साथ अहम बैठक करेगी, जिसमें चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मटीरियल (CSAM) से जुड़ी लापरवाही, वेरिफाइड अकाउंट्स पर गलत कार्रवाई और एल्गोरिदमिक भेदभाव जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फेसबुक पोस्ट अस्थायी रूप से रोके जाने की घटना के बाद बुलाई गई है।

प्रधानमंत्री की पोस्ट रुकने से शुरू हुआ विवाद

यह पूरा मामला 23 जुलाई 2026 को शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो, जो पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुआ था और बाद में फेसबुक पर भी शेयर किया गया, कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म पर रोक दिया गया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए परीक्षा पेपर लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया था। मेटा ने इस घटना के लिए एक तकनीकी खामी को जिम्मेदार बताते हुए माफी मांगी थी, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने इस स्पष्टीकरण को 'अपर्याप्त' करार दिया।

इसी घटना के बाद सरकार ने मेटा के शीर्ष वैश्विक अधिकारियों को भारत बुलाया, ताकि प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और तकनीकी व्यवस्था को लेकर सीधे सवाल पूछे जा सकें।

IT सचिव ने गिनाए मुद्दे

IT सचिव एस कृष्णन ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार मेटा के सामने कई मुद्दे उठाएगी, जिनमें सबसे अहम है CSAM रोकने में हुई लापरवाही। उन्होंने कहा कि एक ऐसी कंपनी जो तकनीक के मामले में दुनिया में सबसे आगे मानी जाती है, उसे अपने सिस्टम को सही तरीके से काम करने लायक बनाना ही चाहिए था।

कृष्णन के मुताबिक, बैठक में यह भी पूछा जाएगा कि सिंथेटिकली जेनरेटेड यानी AI से बने कंटेंट को पहचानने और रोकने के लिए मेटा ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। इसके अलावा, वेरिफाइड अकाउंट्स वाली प्रमुख हस्तियों का कंटेंट हटाने से पहले किस तरह की सुरक्षा प्रक्रिया अपनाई जाती है, इस पर भी सरकार स्पष्टता चाहती है।

मेटा के ग्लोबल अधिकारी होंगे शामिल

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कैप्लन के मौजूद रहने की उम्मीद है, साथ ही इंस्टाग्राम की तकनीकी टीम का एक प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल होगा। यह बैठक 5 और 6 अगस्त को नई दिल्ली में होनी है।

गौरतलब है कि मेटा पहले से ही इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए CSAM से जुड़े कंटेंट के प्रसार को लेकर सरकारी जांच के दायरे में है। इस मुद्दे पर सरकार पहले ही मेटा को नोटिस जारी कर चुकी है, और नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने भी संबंधित प्लेटफॉर्म्स को नोटिस भेजा था।

एल्गोरिदमिक भेदभाव और प्लेटफॉर्म जवाबदेही भी एजेंडे में

इस बैठक में सिर्फ CSAM और अकाउंट एक्शन ही नहीं, बल्कि एल्गोरिदमिक भेदभाव और प्लेटफॉर्म की समग्र जवाबदेही जैसे व्यापक मुद्दे भी चर्चा का हिस्सा होंगे। सरकार का कहना है कि वह यह समझना चाहती है कि मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनी के सिस्टम आखिर उम्मीद के मुताबिक काम क्यों नहीं कर पा रहे, और इसके पीछे कंपनी को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

आगे क्या हो सकता है

यह बैठक भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से भारत सरकार बड़ी टेक कंपनियों पर स्थानीय कानूनों के मुताबिक काम करने और बच्चों की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सख्ती बरतने के लिए दबाव बना रही है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मेटा की तरफ से इन सवालों का क्या जवाब आता है, और क्या आने वाले समय में कंपनी अपनी नीतियों में कोई ठोस बदलाव करती है।

दुनियाभर में बढ़ रही है टेक कंपनियों पर सख्ती

भारत अकेला देश नहीं है जो बड़ी टेक कंपनियों से बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सख्त सवाल पूछ रहा है। दुनियाभर के नियामक संस्थान अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से यह साबित करने की मांग कर रहे हैं कि उनकी कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था सिर्फ कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहारिक तौर पर भी असरदार है। इस वैश्विक रुझान के बीच भारत सरकार का यह कदम दिखाता है कि वह भी अब बड़ी टेक कंपनियों को केवल औपचारिक जवाब देने तक सीमित नहीं रहने देना चाहती, बल्कि ठोस कार्रवाई और तकनीकी सुधार की मांग कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह बैठक सफल रहती है, तो इससे भारत में सोशल मीडिया रेगुलेशन को लेकर एक नई मिसाल कायम हो सकती है। खासतौर पर बच्चों की सुरक्षा और वेरिफाइड अकाउंट्स की पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर मेटा की प्रतिक्रिया आगे चलकर अन्य टेक कंपनियों के लिए भी एक मानक तय कर सकती है। दूसरी तरफ, अगर सरकार को मेटा के जवाब संतोषजनक नहीं लगते, तो आने वाले समय में कंपनी के खिलाफ और सख्त नियामक कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

फिलहाल सभी की निगाहें 5 और 6 अगस्त की इस बैठक पर टिकी हैं, जिसके नतीजे आने वाले दिनों में सार्वजनिक होने की उम्मीद है।

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