उत्तर प्रदेश के चर्चित IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार जालौन में उप-जिलाधिकारी (न्यायिक) के पद पर तैनात राही के खिलाफ उरई कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के वकीलों ने मोर्चा खोल दिया है। अधिवक्ताओं ने उनकी कार्यशैली और व्यवहार पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर उनके तत्काल तबादले की मांग की है।
वकीलों ने क्यों उठाया मुद्दा
उरई कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि SDM (न्यायिक) रिंकू सिंह राही का व्यवहार और कामकाज करने का तरीका न्यायिक प्रक्रिया के लिहाज से उचित नहीं है। वकीलों ने जिलाधिकारी को सौंपे अपने ज्ञापन में उनकी कार्यशैली को लेकर कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं और मांग की है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से यहां से हटाया जाए। यह पहला मौका नहीं है जब राही के कामकाज के तरीके पर सवाल उठे हों — इससे पहले भी अलग-अलग तैनातियों के दौरान उनके व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।
हाल ही में जांच से भी हटाए गए थे
गौरतलब है कि बीते हफ्ते ही रिंकू सिंह राही को एक जांच प्रक्रिया से हटाया गया था, जिसमें उन्हें उरई के पार्षदों से जुड़े एक मामले में 6 अगस्त तक जरूरी शपथपत्र जमा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद अब वकीलों की तरफ से उनके तबादले की मांग उठना दिखाता है कि जालौन-उरई क्षेत्र में उनकी तैनाती को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार असंतोष बना हुआ है।
पहले भी रहा है विवादों से नाता
रिंकू सिंह राही, जो उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के IAS अधिकारी हैं, अपने प्रशासनिक करियर में पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। इसी साल जून में जालौन में एक भाजपा ब्लॉक प्रमुख के साथ हुई कथित झड़प के बाद उन्हें जालौन SDM के पद से हटाकर उरई में न्यायिक SDM के तौर पर तैनात किया गया था। इससे पहले मार्च 2026 में उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इस्तीफा भी दिया था, हालांकि बाद में उन्होंने इसे वापस ले लिया था। इसके अलावा शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान भी वे तब चर्चा में आए थे, जब तहसील परिसर में सफाई की कमी की जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने खुद वकीलों के सामने उठक-बैठक की थीं।
संघर्ष और प्रेरणादायक रहा है व्यक्तिगत सफर
रिंकू सिंह राही की कहानी सिर्फ विवादों तक सीमित नहीं है। IAS बनने से पहले वे 2008 में मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी के तौर पर तैनात थे, जहां उन्होंने एक छात्रवृत्ति योजना में ₹80 करोड़ से ज्यादा के घोटाले का पर्दाफाश किया था। इसी भ्रष्टाचार-विरोधी मुहिम की वजह से 2009 में स्थानीय गुंडों ने उन पर जानलेवा हमला किया, जिसमें उनकी एक आंख की रोशनी हमेशा के लिए चली गई। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 2022 में दिव्यांग कोटे के तहत सिविल सेवा परीक्षा पास कर IAS अधिकारी बनने का अपना सपना पूरा किया।
प्रशासन के सामने अब क्या विकल्प
फिलहाल जिला प्रशासन के सामने वकीलों की इस मांग पर फैसला लेने की चुनौती है। जालौन के जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय को सौंपे गए ज्ञापन पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। स्थानीय स्तर पर यह देखा जा रहा है कि प्रशासन इस मामले को किस तरह हैंडल करता है, खासकर तब जब राही का हाल के महीनों में यह लगातार दूसरा या तीसरा विवाद है।
आगे क्या
फिलहाल यह मामला उरई और जालौन प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। वकीलों की मांग पर प्रशासन क्या रुख अपनाता है, और क्या रिंकू सिंह राही का एक बार फिर तबादला किया जाता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। उनका अब तक का प्रशासनिक सफर लगातार संघर्ष, विवाद और चर्चाओं से भरा रहा है, और यह ताजा घटनाक्रम भी उसी कड़ी का हिस्सा बनता दिख रहा है।





