भारत के व्यापार और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बढ़ती गतिविधियों के कारण दुनिया की बड़ी कंपनियां यहां अपना भरोसा बढ़ा रही हैं। FedEx की भारतीय उपमहाद्वीप, मध्य पूर्व और अफ्रीका की अध्यक्ष कामी विश्वनाथन ने कहा है कि कई वैश्विक कंपनियां भारत को एक बहुत अच्छा वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत के रूप में देख रही हैं। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और अन्य उच्च प्रौद्योगिकी वाले क्षेत्रों में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी कारण फेडेक्स ने दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक नए एयर कार्गो हब के निर्माण की घोषणा की है। कंपनी इस परियोजना पर लगभग 1,250 करोड़ रुपए का निवेश करेगी।
दिल्ली में एक अत्याधुनिक एयर कार्गो हब बनेगा
फेडेक्स का नया हब दिल्ली एयरपोर्ट के GMR Cargo City में बनेगा। कंपनी के मुताबिक यह हब भारत के उत्तर और पूर्वी हिस्सों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यहां पर इंटरनेशनल गेटवे सेवाओं के साथ पिकअप और डिलीवरी ऑपरेशंस को एक ही स्थान पर किया जाएगा। इससे लोगों को सामान की आवाजाही और प्रोसेसिंग के लिए अब अधिक आसानी होगी। लगभग 2.30 लाख वर्ग फुट में फैले इस हब में आधुनिक ऑटोमेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसमें ऑटोमेटेड सॉर्टेशन सिस्टम, हाई-स्पीड एक्स-रे स्क्रीनिंग, आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था और इंटेलिजेंट पैकेज हैंडलिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। कंपनी का दावा है कि हब के शुरू होने के बाद पैकेज प्रोसेसिंग क्षमता मौजूदा करीब 600 पैकेज प्रति घंटे से बढ़कर 5,000 पैकेज प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
हाई-टेक सेक्टर में भारत की बढ़ती भूमिका
कामी विश्वनाथन ने भारत के व्यापारिक भविष्य के बारे में अपना विश्वास जताया है। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में भारत में मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। फेडेक्स ने भारत से अमेरिका और यूरोप के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार की है और एशिया से भारत आने वाले व्यापारिक मार्गों को मजबूत किया है। कंपनी ने बेंगलुरु, नवी मुंबई और अब दिल्ली में लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार किया है। विश्वनाथन के मुताबिक, कंपनियां अपने उत्पादन और सोर्सिंग नेटवर्क में विविधता लाने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में भारत के लिए एक भरोसेमंद वैकल्पिक सप्लाई सोर्स बनने का अवसर बढ़ रहा है। खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थकेयर, सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, ऑटोमोबाइल और इंडस्ट्रियल सेक्टर जैसे हाई-वैल्यू क्षेत्रों में भारत की क्षमता को वैश्विक कंपनियां तेजी से पहचान रही हैं।
MSME और छोटे निर्यातकों को भी मिलेगा फायदा
फेडेक्स के इस विस्तार का फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक ही सीमित नहीं है। कंपनी छोटे और मध्यम आकार के निर्यातकों को भी अपने वैश्विक नेटवर्क और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञता के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रही है। फेडेक्स भारत सरकार के ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ कार्यक्रम के साथ भी काम कर रहा है। कंपनी के अनुसार, यह पहल देश के करीब 750 जिलों से जुड़े 200 से अधिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद कर रही है। बेहतर एयर कार्गो कनेक्टिविटी और तेज शिपमेंट प्रोसेसिंग से छोटे कारोबारियों के लिए भी विदेशों में अपने उत्पाद भेजना आसान हो सकता है। इससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार मिलने के साथ निर्यात क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
भारत के लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगी मजबूती
दिल्ली का नया हब GMR Cargo City का हिस्सा होगा, जो एयरपोर्ट पर विकसित किया जा रहा एक बड़ा एकीकृत कार्गो और लॉजिस्टिक्स केंद्र है। करीब 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रही इस परियोजना में भविष्य में लगभग 15 से 20 लाख वर्ग फुट तक विकास की क्षमता बताई गई है। फेडेक्स का दिल्ली में यह निवेश ऐसे समय में हो रहा है जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और खुद को एक प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। कंपनी इससे पहले भी भारत में लॉजिस्टिक्स और एयर कार्गो नेटवर्क को मजबूत करने के लिए निवेश कर चुकी है। नवी मुंबई में फेडेक्स के एक अलग अत्याधुनिक एयर कार्गो हब पर भी काम चल रहा है, जिसे पश्चिमी भारत के अंतरराष्ट्रीय व्यापार कॉरिडोर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सभी बातों के बाद, कामी विश्वनाथन के बयान और फेडेक्स के दिल्ली में नए निवेश के बारे में जानकारी भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में बढ़ती अहमियत की ओर इशारा करती है। हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, हेल्थकेयर और अन्य उच्च-मूल्य वाले सेक्टर में भारत की भूमिका बढ़ रही है। इसके साथ ही तेज और भरोसेमंद लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता भी बढ़ेगी। ऐसे में दिल्ली में बनने वाला यह नया एयर कार्गो हब भारत के निर्यातकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने और देश की व्यापारिक क्षमता को और मजबूत करने में मदद कर सकता है।





