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भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल: एक हफ्ते में $10.5 अरब बढ़कर पहुंचा $692.87 अरब पर

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 31 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में $10.51 अरब बढ़कर $692.87 अरब पर पहुंच गया, जो 30 जनवरी के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी है। यह उछाल मुख्य रूप से जून में शुरू हुई FCNR डिपॉजिट स्कीम से मिले $36.7 अरब के प्रवाह के कारण आया। फरवरी 2026 में भंडार $728.49 अरब के ऑल-टाइम हाई पर था, लेकिन पश्चिम एशिया संघर्ष के चलते इसमें गिरावट आई थी। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में यह $700 अरब के पार जा सकता है।

India Junction News Desk
9/8/2026
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में जोरदार उछाल: एक हफ्ते में $10.5 अरब बढ़कर पहुंचा $692.87 अरब पर

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) में जोरदार उछाल देखने को मिला है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में यह भंडार $10.51 अरब बढ़कर $692.87 अरब पर पहुंच गया, जो 30 जनवरी के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में यह अपने ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंच सकता है।

तीन महीने का सबसे ऊंचा स्तर

RBI के मुताबिक इससे पिछले हफ्ते यानी 24 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते में भंडार $6.12 अरब बढ़कर $682.35 अरब पर था। अब ताजा उछाल के बाद यह लगभग तीन महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि फरवरी 2026 में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अपने अब तक के सर्वोच्च स्तर $728.49 अरब पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद पश्चिम एशिया में शुरू हुए संघर्ष के चलते रुपये पर दबाव बढ़ा और RBI को बाजार में डॉलर बेचकर हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे भंडार में लगातार कई हफ्तों तक गिरावट देखी गई थी।

FCNR डिपॉजिट स्कीम बनी बड़ी वजह

बाजार जानकारों के मुताबिक इस भारी बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह जून 2026 में RBI द्वारा शुरू की गई विदेशी मुद्रा जमा योजना (FCNR डिपॉजिट ड्राइव) है, जिसका मकसद देश के भुगतान संतुलन को मजबूत करना था। 31 जुलाई तक इस योजना के तहत बैंकों के जरिए कुल $36.7 अरब की रकम जुटाई जा चुकी है। इसके अलावा FCNR(B), ECB और OFCB के जरिए हुए कुल प्रवाह की बात करें तो यह आंकड़ा करीब $40.8 अरब तक पहुंच चुका है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इसमें से करीब आधी रकम ही RBI की वास्तविक डॉलर खरीद में तब्दील हो पाई है।

कहां से आई यह बढ़ोतरी

RBI के आंकड़ों के मुताबिक भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा माने जाने वाले विदेशी मुद्रा एसेट्स (FCA) में $8.75 अरब की बढ़ोतरी हुई, जिससे यह $564.68 अरब पर पहुंच गया। बाजार के जानकारों के मुताबिक इस हफ्ते के दौरान RBI ने करीब $4.1 अरब की सीधी डॉलर खरीद की, जबकि बाकी बढ़ोतरी डॉलर के कमजोर होने और अन्य मुद्राओं की रीवैल्यूएशन गेन के कारण हुई। इसके अलावा सोने के भंडार में भी $1.69 अरब की बढ़ोतरी हुई, जो अब $104.74 अरब पर पहुंच गया है। स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में $48 मिलियन और IMF के पास भारत की रिजर्व पोजिशन में $28 मिलियन की मामूली बढ़ोतरी दर्ज हुई।

$700 अरब के पार जाने की उम्मीद

एक फॉरेक्स कंसल्टेंसी फर्म के प्रमुख के मुताबिक जैसे-जैसे FCNR स्कीम से मिलने वाला प्रवाह रफ्तार पकड़ रहा है, आने वाले हफ्तों में भंडार का आंकड़ा $700 अरब के पार जाने की उम्मीद है। इससे RBI को अपनी शॉर्ट फॉरेक्स बुक कम करने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि आने वाले समय में बड़ी तस्वीर रुपये की मजबूती के पक्ष में ही बनी रहने वाली है।

RBI गवर्नर ने कहा- भंडार पर्याप्त और मजबूत

हाल ही में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सभी मानक मानदंडों के हिसाब से पर्याप्त है, और इससे देश के पास 10 महीने से ज्यादा का आयात कवर तथा 90.8 प्रतिशत का बाह्य ऋण कवर मौजूद है। इसी नीति समीक्षा में RBI ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए यथास्थिति बनाए रखी थी, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही रहा।

आम आदमी और अर्थव्यवस्था के लिए क्यों अहम

विदेशी मुद्रा भंडार में इस तरह की मजबूती देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जाती है। बड़ा भंडार होने से RBI को जरूरत पड़ने पर रुपये को स्थिर रखने और बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने की ज्यादा क्षमता मिलती है। खासतौर पर तब, जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारक मौजूद हों, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए भरोसे का एक बड़ा आधार बनता है।

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