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ISI नेटवर्क का बड़ा खुलासा:गाजियाबाद से पकड़ा गयाजासूसी गिरोह

देश की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां Inter-Services Intelligence (ISI) से जुड़े कथित जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। गाजियाबाद पुलिस ने समीर नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार कर इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारत के संवेदनशील सैन्य ठिकानों की रेकी कर जानकारी विदेशों तक पहुंचा रहा था।

India Junction News Desk
26/3/2026
ISI नेटवर्क का बड़ा खुलासा:गाजियाबाद से पकड़ा गयाजासूसी गिरोह

जहां एक ओर ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, वहीं भारत के अंदर सामने आई इस जासूसी साजिश ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। गाजियाबाद पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए समीर नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे गिरोह का अहम हिस्सा बताया जा रहा है।

दिल्ली के एक होटल में काम करने वाला समीर दिखने में आम व्यक्ति था, लेकिन जांच में सामने आया कि वह पिछले करीब एक साल से पाकिस्तान सीमा से सटे गुजरात से लेकर पंजाब तक सैन्य ठिकानों की रेकी कर रहा था। वह इन ठिकानों की फोटो और वीडियो बनाकर विदेशी हैंडलर्स तक भेजता था, जिससे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क Inter-Services Intelligence (ISI) से जुड़ा हुआ है और इसका संचालन नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश जैसे देशों से किया जा रहा था। इन देशों में बैठे एजेंट भारत के युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसा रहे थे और उन्हें अलग-अलग टास्क सौंप रहे थे।

पुलिस के अनुसार, समीर को व्हाट्सएप और टेलीग्राम के उन ग्रुप्स में जोड़ा गया था, जो कथित तौर पर गैंगस्टर Lawrence Bishnoi और ISI हैंडलर सरफराज द्वारा संचालित किए जा रहे थे। इन ग्रुप्स के जरिए देश-विदेश के युवाओं को जोड़कर उनसे संवेदनशील जगहों की जानकारी जुटाने का काम कराया जाता था।

जांच में यह भी सामने आया है कि दुबई में बैठे एजेंटों को पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों—जैसे शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार—से ज्यादा से ज्यादा युवाओं को इस नेटवर्क से जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।

एजेंसियों का कहना है कि इन ग्रुप्स में धार्मिक गतिविधियों से जुड़े वीडियो शेयर कर युवाओं का ब्रेनवॉश किया जाता था, ताकि उन्हें धीरे-धीरे इस नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा सके। साथ ही, ISI हैंडलर अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे थे, जिससे उन पर शक न हो।

खुलासा यह भी हुआ है कि ‘सरदार’ नाम से एक व्हाट्सएप ग्रुप चलाया जा रहा था, जिसे सरफराज नाम का हैंडलर ऑपरेट कर रहा था। कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर खुद को अलग पहचान देने की कोशिश करते थे, ताकि लोगों को भ्रमित किया जा सके।

इस नेटवर्क में जुड़े युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे। हर तीसरे दिन ज़ूम मीटिंग के जरिए इन गतिविधियों की समीक्षा होती थी, जिसमें विदेशों में बैठे सरगना भी शामिल होते थे।

Narendra Pratap Singh (SP) के मुताबिक, इस नेटवर्क से जुड़े करीब 250 लोग पुलिस के रडार पर हैं और जांच लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। उन्होंने बताया कि समीर को इस काम के बदले तीन बार में कुल 5000 रुपये दिए गए थे—पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, जबकि तीसरी बार 2000 रुपये मिले थे।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से भेजी गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं। साथ ही, आरोपी से जुड़े अन्य लोगों की तलाश के लिए कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।

यह पूरा मामला इस बात की गंभीर चेतावनी है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं को जाल में फंसाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है।

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