झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर छात्रों का आंदोलन जुलाई के अंत से लगातार तेज़ होता जा रहा है। 10 अगस्त 2026 को हज़ारों छात्रों ने रांची में विधानसभा भवन की ओर मार्च किया, जिसे रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और बैरिकेडिंग का सहारा लिया।
आंदोलन की शुरुआत कैसे हुई
यह आंदोलन 29 जुलाई 2026 को उस समय शुरू हुआ जब अभ्यर्थियों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरना देना शुरू किया। छात्रों का आरोप है कि JPSC की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताएं हुई हैं, जिससे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआती दिनों में यह प्रदर्शन धरना, पदयात्रा और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के रूप में हुआ, और धीरे-धीरे विभिन्न छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और कई राजनीतिक नेताओं का समर्थन भी इसे मिलने लगा।
6 अगस्त को झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र विपक्ष के हंगामे और छात्र आंदोलन के बीच शुरू हुआ, जिसमें पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान 19 लोगों को हिरासत में लिया। अगले दिन तक यह आंदोलन अपने 14वें दिन में पहुंच चुका था, जिसमें छात्रों की भूख हड़ताल जारी रही और सरकार से बातचीत के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी तैयार किया गया।
10 अगस्त का मार्च और पुलिस कार्रवाई
सोमवार, 10 अगस्त को आंदोलन ने और उग्र रूप ले लिया जब छात्रों का बड़ा जुलूस रांची स्थित राज्य विधानसभा भवन की ओर बढ़ा। सुरक्षा के लिहाज से विधानसभा को बहुस्तरीय कंटीली तार की बैरिकेडिंग से घेरा गया था और निगरानी के लिए ड्रोन भी तैनात किए गए थे। जगन्नाथ मंदिर के पास, जो विधानसभा परिसर से लगभग 3 किलोमीटर दूर है, जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड लांघने लगे तो सुरक्षाबलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
इस आंदोलन में कम से कम छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इनमें छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हैं, जो नौ दिनों की भूख हड़ताल के बाद स्ट्रेचर पर मार्च में शामिल हुए। भीड़ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भूख हड़ताल के बावजूद कंटीले तार उन्हें रोक नहीं पाएंगे।
छात्रों की मुख्य मांगें क्या हैं
प्रदर्शनकारी मुख्य रूप से राज्य की परीक्षा प्रणाली में पूर्ण सुधार, कुछ विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपे जाने की मांग कर रहे हैं। रविवार रात राज्य सरकार ने 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और दो बैकलॉग भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति जताई, साथ ही JPSC के तीन सदस्यों ने राज्य जांच एजेंसियों की पूछताछ के बाद इस्तीफा भी दे दिया।
हालांकि छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक सरकार कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा को रद्द नहीं करती और पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नहीं सौंपती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
व्यापक संदर्भ
यह आंदोलन ऐसे समय हो रहा है जब दो हफ्ते पहले ही नई दिल्ली में युवाओं के नेतृत्व वाले "कॉकरोच" आंदोलन के दबाव में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को मेडिकल प्रवेश परीक्षा लीक मामले में इस्तीफा देना पड़ा था। ऑनलाइन मूवमेंट कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित वह प्रदर्शन 36 दिनों तक चला था। विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड का यह आंदोलन उसी तरह की युवा असंतोष लहर का हिस्सा है, जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर देशभर में उभर रही है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार छात्रों की शेष मांगों, विशेषकर CGL परीक्षा रद्द करने और CBI जांच को लेकर, क्या रुख अपनाती है। फिलहाल रांची में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है।
(यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। स्थिति लगातार बदल रही है, इसलिए ताज़ा अपडेट के लिए विश्वसनीय समाचार स्रोतों से जुड़े रहें।)
स्रोत:
- Al Jazeera – Protesters rally in India's Jharkhand over alleged exam irregularities (10 Aug 2026)
- Wikipedia – 2026 Jharkhand student protests





