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मुंबई में अतिक्रमण हटाने पर गरमाई राजनीति, किरीट सोमैया बोले- घुसपैठियों को वापस भेजेंगे

मुंबई में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर बीजेपी नेता किरीट सोमैया का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की व्यवस्था की जा रही है।

India Junction News Desk
19/5/2026
मुंबई में अतिक्रमण हटाने पर गरमाई राजनीति, किरीट सोमैया बोले- घुसपैठियों को वापस भेजेंगे

मुंबई में अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। भाजपा नेता Kirit Somaiya ने मुंबई में चल रही कार्रवाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जों और कथित घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और “घुसपैठियों को वापस भेजने की व्यवस्था” भी की गई है। सोमैया के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। दरअसल, मुंबई और उसके आसपास के कई इलाकों में पिछले कुछ समय से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चल रही है। नगर निगम और प्रशासन अवैध निर्माण, झुग्गियों और सरकारी जमीन पर बने कब्जों को हटाने के लिए अभियान चला रहे हैं। इसी कार्रवाई को लेकर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने दावा किया कि यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने का मामला नहीं है, बल्कि अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान और कार्रवाई का मुद्दा भी है।

सोमैया ने आरोप लगाया कि मुंबई में बड़ी संख्या में ऐसे लोग रह रहे हैं जो अवैध तरीके से देश में घुसे और बाद में झुग्गियों और अवैध निर्माणों में बस गए। उन्होंने कहा कि सरकार अब ऐसे लोगों की पहचान कर रही है और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपने बयान में किसी विशेष समुदाय का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया शुरू हो गई। भाजपा का कहना है कि मुंबई में अवैध कब्जों के कारण ट्रैफिक, कानून व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ता है। पार्टी नेताओं का दावा है कि शहर को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए अवैध निर्माण हटाना जरूरी है। वहीं विपक्षी दलों ने सोमैया के बयान पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि भाजपा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है।

शिवसेना (उद्धव गुट) और कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अतिक्रमण हटाने का मुद्दा प्रशासनिक हो सकता है, लेकिन “घुसपैठियों” जैसे शब्दों का इस्तेमाल सामाजिक तनाव बढ़ा सकता है। विपक्ष का कहना है कि गरीब और मजदूर वर्ग को निशाना बनाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है। मुंबई में अतिक्रमण का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। शहर में बड़ी संख्या में झुग्गी बस्तियां हैं और समय-समय पर नगर निगम द्वारा कार्रवाई की जाती रही है। लेकिन हर बार यह मुद्दा राजनीतिक विवाद में बदल जाता है, क्योंकि इसमें गरीब बस्तियों, प्रवासी मजदूरों और अवैध निर्माण का सवाल जुड़ा होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुंबई जैसे महानगर में अतिक्रमण हटाना सिर्फ प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक मुद्दा भी है। शहर में लाखों लोग रोजगार की तलाश में आते हैं और आवास की कमी के कारण झुग्गियों में रहने को मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में जब भी बड़े स्तर पर बुलडोजर कार्रवाई होती है, तो राजनीतिक बयानबाजी और विवाद बढ़ना तय माना जाता है। केंद्र और राज्य सरकारें लगातार अवैध निर्माण और अवैध घुसपैठ के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा और शहरी व्यवस्था से जोड़कर देख रही हैं। यही वजह है कि कई राज्यों में अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर सख्त कार्रवाई देखने को मिल रही है। फिलहाल मुंबई में चल रही कार्रवाई और किरीट सोमैया के बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा इसे कानून और व्यवस्था का मामला बता रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है, क्योंकि मुंबई की राजनीति में अतिक्रमण और प्रवासी आबादी हमेशा से बेहद संवेदनशील विषय रहे हैं।

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