सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा को हेट स्पीच से जुड़े एक मामले में वर्चुअली पेश होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने उनकी अंडे फेंके जाने की आशंका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आजादी के लड़ाकों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं, तो एक सांसद अंडों से क्यों डर रही हैं। मोइत्रा के वकील ने इसके बाद याचिका वापस ले ली।
क्या है पूरा मामला
यह मामला जून 2026 में भाजपा नेता की शिकायत पर पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के होगलबेड़िया थाने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर अपलोड किए गए वीडियो और पोस्ट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली और भड़काऊ टिप्पणियां कीं। कलकत्ता हाईकोर्ट ने इससे पहले उन्हें अंतरिम राहत देते हुए जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था, जिसकी तारीख 14 अगस्त तय की गई थी।
वर्चुअल पेशी की मांग को लेकर पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट
महुआ मोइत्रा ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के जरिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर वर्चुअल तरीके से पेश होने की अनुमति मांगी थी। उनका तर्क था कि उनके निर्वाचन क्षेत्र कृष्णानगर में पहले भी उन पर अंडे फेंके जाने की घटनाएं और धमकियां मिल चुकी हैं, जो पश्चिम बंगाल में भाजपा के सत्ता में आने के बाद हुए राजनीतिक टकराव से जुड़ी थीं। उनकी दलील थी कि उन्हें वर्चुअल पेशी का कानूनी अधिकार है, और पुलिस के नोटिस में उन्हें अपने ही निर्वाचन क्षेत्र के थाने में पेश होने के लिए कहा गया है, जहां सुरक्षा को लेकर उन्हें आशंका है।
कोर्ट ने सख्त शब्दों में की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट इस दलील से सहमत नहीं दिखा। जस्टिस दीपांकर दत्ता ने टिप्पणी करते हुए कहा, "आप एक सांसद हैं? राजनीति में कदम रखने के बाद आपको अंडों से डर लगता है? जब हमारे आजादी के लड़ाकों ने अपनी छाती पर गोलियां खाई थीं? ऐसी याचिकाएं तो इस अदालत के सामने आनी ही नहीं चाहिए।" बेंच ने साफ किया कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के लायक नहीं है, और इससे जुड़ी किसी भी शिकायत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया जा सकता है। इसके बाद मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस ले ली, जिसे कोर्ट ने वापस लिए जाने के आधार पर खारिज कर दिया।
पहले भी विवादों से रहा है नाता
गौरतलब है कि महुआ मोइत्रा इससे पहले भी 'कैश फॉर क्वेरी' यानी सवाल पूछने के बदले रिश्वत लेने के मामले में विवादों में रह चुकी हैं, जिसके चलते उन्हें लोकसभा से निष्कासित भी किया जा चुका है। उस मामले में एथिक्स कमेटी ने उन्हें व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी को अपने संसदीय पोर्टल की लॉगिन जानकारी साझा करने का दोषी पाया था, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था। मोइत्रा ने उस वक्त भी अपने निष्कासन को 'कंगारू कोर्ट' जैसी कार्रवाई बताते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इसकी खासी चर्चा हो रही है। जहां कुछ लोग अदालत की इस सख्त टिप्पणी को उचित बता रहे हैं, वहीं कुछ का कहना है कि किसी भी नागरिक, चाहे वह सांसद ही क्यों न हो, की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यह मामला एक बार फिर राजनीतिक हस्तियों और आम जनता के बीच सुरक्षा तथा कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर बहस को हवा दे रहा है।
आगे क्या होगा
फिलहाल महुआ मोइत्रा को 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा, जैसा कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले निर्देश दिया था। अगर उन्हें सुरक्षा को लेकर आगे भी कोई चिंता रहती है, तो सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उन्हें इसके लिए हाईकोर्ट का रुख करना होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे इस मामले में जांच किस दिशा में बढ़ती है, और मोइत्रा की तरफ से इस पर आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।





