पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर हिंसा और तनाव की खबरों के कारण सुर्खियों में है। इस बार मामला राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Suvendu Adhikari के बेहद करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या से जुड़ा है। मध्यमग्राम इलाके में हुई इस सनसनीखेज वारदात ने न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनावी माहौल और लगातार बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच हुई इस घटना को लेकर भाजपा और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं।
जानकारी के अनुसार, चंद्रनाथ रथ देर रात अपने कुछ सहयोगियों के साथ कार से जा रहे थे। इसी दौरान मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके के पास बाइक सवार कुछ हमलावरों ने उनकी गाड़ी का पीछा करना शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हमलावर पहले से ही रथ की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे। जैसे ही उनकी गाड़ी एक सुनसान मोड़ के पास पहुंची, हमलावरों ने अचानक ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि कई गोलियां कार के शीशों को चीरते हुए अंदर जा लगीं। गोली लगने के बाद कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे रुक गई और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। गंभीर हालत में चंद्रनाथ रथ को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस हमले में उनका ड्राइवर भी घायल बताया जा रहा है, जिसका इलाज चल रहा है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी। आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।
चंद्रनाथ रथ को भाजपा के अंदर बेहद प्रभावशाली और भरोसेमंद चेहरों में गिना जाता था। वह लंबे समय से सुवेंदु अधिकारी के साथ जुड़े हुए थे और संगठनात्मक गतिविधियों से लेकर राजनीतिक रणनीतियों तक कई अहम जिम्मेदारियां संभालते थे। चुनावी अभियानों के दौरान भी उनकी सक्रिय भूमिका रहती थी। पार्टी के कई नेताओं का कहना है कि रथ सिर्फ एक सहयोगी नहीं बल्कि सुवेंदु अधिकारी की टीम के सबसे अहम सदस्यों में से एक थे।
घटना के बाद भाजपा नेताओं ने इसे सीधा राजनीतिक हमला बताया है। पार्टी का आरोप है कि पश्चिम बंगाल में लगातार विपक्षी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्य में लोकतांत्रिक माहौल कमजोर हो रहा है और राजनीतिक हिंसा आम होती जा रही है। कई नेताओं ने इस घटना की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और कहा है कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी राज्यभर में आंदोलन करेगी।
भाजपा समर्थकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से बंगाल में राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है। चुनाव के दौरान और उसके बाद हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे माहौल में चंद्रनाथ रथ की हत्या ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। भाजपा इसे केवल एक आपराधिक घटना नहीं बल्कि सुनियोजित साजिश बता रही है।
वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी All India Trinamool Congress ने भी घटना की निंदा की है। पार्टी नेताओं ने कहा कि किसी भी प्रकार की हिंसा स्वीकार नहीं की जा सकती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताते हुए कहा कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा। कुछ नेताओं ने निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की भी मांग की है।
राज्य पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक रंजिश और आपराधिक साजिश जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक हमलावर पेशेवर तरीके से वारदात को अंजाम देकर मौके से फरार हुए, जिससे यह साफ है कि पूरी योजना पहले से तैयार थी। पुलिस की विशेष टीम को जांच में लगाया गया है और सीमावर्ती इलाकों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
इस घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा की पुरानी बहस को हवा दे दी है। राज्य में लंबे समय से चुनावी टकराव और राजनीतिक संघर्ष की घटनाएं सामने आती रही हैं। अलग-अलग राजनीतिक दल अक्सर एक-दूसरे पर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि हर घटना के बाद प्रशासन निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा देता है, लेकिन राजनीतिक माहौल में तनाव लगातार बना रहता है।
सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने अपना बेहद करीबी साथी खो दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में विपक्षी नेताओं की सुरक्षा खतरे में है और अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म होता जा रहा है। उन्होंने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकती है। विपक्ष इसे कानून-व्यवस्था का मुद्दा बनाकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा, जबकि सत्ताधारी दल जांच पूरी होने तक राजनीतिक आरोपों से बचने की रणनीति अपना सकता है। लेकिन इतना तय है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या ने पश्चिम बंगाल की सियासत को एक बार फिर उबाल पर ला दिया है।
फिलहाल पूरे राज्य की नजर पुलिस जांच पर टिकी हुई है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस हत्या के पीछे कौन लोग हैं और क्या यह केवल व्यक्तिगत दुश्मनी थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक साजिश छिपी हुई है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले से जुड़े नए खुलासे सामने आ सकते हैं। लेकिन अभी के लिए यह घटना बंगाल की राजनीति में भय, तनाव और आरोप-प्रत्यारोप के एक नए दौर की शुरुआत करती नजर आ रही है।





