NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में करीब 20,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच में सामने आया है कि यह लीक कोई बाहरी साजिश नहीं, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अपने ही तीन विषय विशेषज्ञों द्वारा अंजाम दी गई इनसाइडर वारदात थी, जिन्होंने सवालों को चिट पर लिखकर और याद करके बाहर पहुंचाया।
कैसे हुआ पूरा खेल
CBI की चार्जशीट के मुताबिक कैमिस्ट्री, बॉटनी और फिजिक्स के तीन NTA सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स — पी. वी. कुलकर्णी, मनीषा मांधरे और मनीषा हवलदार — ने NTA मुख्यालय की गोपनीय सेक्शन में काम करते हुए यह लीक अंजाम दी। ये तीनों प्रश्नपत्र के ट्रांसलेशन और बैक-ट्रांसलेशन (एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद और फिर वापस मूल भाषा में जांच) के काम में तैनात थे। जांच में सामने आया कि गोपनीय सेक्शन में एंट्री-एग्जिट के समय एक्सपर्ट्स की तलाशी लेने की कोई व्यवस्था ही नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर इन लोगों ने सवालों की चिट बनाईं।
आसान सवालों को ये एक्सपर्ट्स सीधे याद कर लेते थे और शाम को होटल कमरे में लौटकर उन्हें नोटबुक में लिख लेते थे। चार्जशीट के मुताबिक अकेले कुलकर्णी ने 31 मार्च से 2 अप्रैल 2026 के बीच तीन दिनों में कुल 135 सवालों का बैक-ट्रांसलेशन किया था, जिनमें से ज्यादातर सवाल उन्होंने NCERT किताबों के पैराग्राफ के हिसाब से अलग-अलग चिट पर नोट कर लिए।
डिजिटल फॉर्म में नहीं, बल्कि 'लिखवाकर' पहुंचाया गया पेपर
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस लीक की सबसे खास बात यह रही कि पेपर कभी भी डिजिटल फॉर्मेट में बाहर नहीं भेजा गया, ताकि कोई डिजिटल सबूत न बचे। इसके बजाय चुनिंदा छात्रों को खास कोचिंग सेशन में बुलाकर उनसे सवाल लिखवाए जाते थे। इन एक्सपर्ट्स का मकसद सिर्फ पैसा कमाना ही नहीं था, बल्कि अपनी निजी कोचिंग क्लासेज़ का रिजल्ट बेहतर दिखाकर उनकी साख बढ़ाना भी था। हालांकि आखिरकार एक आरोपी ने पूरे पेपर को दोबारा तैयार कर उसे आगे सर्कुलेट किया, जिससे डिजिटल ट्रेल बना और यही जांच एजेंसियों तक पहुंचने की वजह बना।
₹21 लाख तक में बिका पेपर, ब्रोकर और कोचिंग नेटवर्क भी शामिल
CBI का दावा है कि लीक हुआ पेपर ब्रोकरों, कोचिंग ऑपरेटरों और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए कई राज्यों में छात्रों तक पहुंचाया गया, और कुछ मामलों में इसके लिए ₹21 लाख तक की रकम वसूली गई। एक मामले में एक छात्रा और उसके पिता को ₹4 लाख में लीक पेपर के साथ-साथ कोचिंग सपोर्ट और ऑफलाइन रिविजन क्लासेज़ का भी ऑफर दिया गया था, जो खुद एक NTA एक्सपर्ट द्वारा कराई जा रही थीं। जब्त किए गए मोबाइल फोन, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल डिवाइसेज़ की फॉरेंसिक जांच में लीक हुए सवालों वाली PDF और इमेज फाइलें भी मिलीं, जिन्हें टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के जरिए सर्कुलेट किया गया था।
13 आरोपी न्यायिक हिरासत में, कड़ी धाराओं में केस दर्ज
CBI ने अब तक कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी धाराओं के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। यह चार्जशीट 28 जुलाई को इकोनॉमिक ऑफेंसेज विंग के सामने दाखिल की गई थी, और 29 जुलाई को इसे विशेष फास्ट-ट्रैक कोर्ट की जज अनु ग्रोवर बालिगा के सामने औपचारिक रूप से पेश किया गया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद आई चार्जशीट
गौरतलब है कि यह चार्जशीट तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ ही दिनों बाद दाखिल की गई। देशभर में हुए छात्र आंदोलनों और संसद में हुए हंगामे के दबाव में उन्होंने पद छोड़ा था। इस मामले ने न सिर्फ संसद की कार्यवाही को बाधित किया, बल्कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हफ्तों तक चले छात्र आंदोलन को भी जन्म दिया, जिसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे नए संगठन भी सक्रिय रूप से शामिल हुए।
आगे की जांच जारी
CBI के मुताबिक जब्त इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज़ की फॉरेंसिक जांच अभी भी जारी है, और आने वाले समय में इस मामले में और चार्जशीट दाखिल होने की उम्मीद है। कोर्ट ने इस मामले पर आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आरोप अदालत में साबित होते हैं, तो यह भारत की परीक्षा प्रणाली में अब तक के सबसे बड़े इनसाइडर घोटालों में से एक साबित हो सकता है, जिससे भविष्य में परीक्षाओं की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त बनाने की मांग तेज हो सकती है।





