एक समय मायावती के बहुत करीबी रहे और बहुजन समाज पार्टी के एक प्रमुख नेता माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने अंबेडकर जयंती से ठीक पहले एक ऐसा बयान दिया है, जिसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा दी है। यह बयान कानपुर से आया है और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित, पिछड़ा और मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
क्या कहा नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने ?
कानपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भारतीय जनता पार्टी सरकार और भारत निर्वाचन आयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम हो रहा है।
दलित वोट बैंक पर फोकस
सिद्दीकी ने अपने संबोधन में दलित, पिछड़े और मुस्लिम समाज की एकता पर जोर दिया और दावा किया कि 2027 में अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह बयान पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक समीकरण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है।
आजम खान का जिक्र
अपने बयान में उन्होंने आजम खान को “बड़ा भाई” बताते हुए उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आजम खान का राजनीतिक कद बेहद ऊंचा है।
चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भारत निर्वाचन आयोग को भारतीय जनता पार्टी की ‘कठपुतली’ करार देते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता प्रभावित हो रही है और विशेष वर्गों के वोट काटे जा रहे हैं।
शायराना तंज
उन्होंने मौजूदा हालात पर तंज कसते हुए कहा— “कातिल ही मुहाफिज और सिपाही बन गए हैं…” इस बयान के जरिए उन्होंने समाज में बढ़ते डर और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए।
राजनीतिक विश्लेषण
इस बयान के कई सियासी संकेत माने जा रहे हैं—
चुनाव आयोग और सरकार पर सीधा हमला
दलित + पिछड़ा + मुस्लिम समीकरण को मजबूत करने की कोशिश
2027 चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की आक्रामक रणनीति
निष्कर्ष
अंबेडकर जयंती से पहले दिया गया यह बयान साफ संकेत देता है कि उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव सामाजिक समीकरणों पर केंद्रित रहेगा। अब देखना होगा कि समाजवादी पार्टी की यह रणनीति कितना असर दिखा पाती है।





