प्रयागराज में बुधवार को हुई भारी बारिश ने शहर के विकास के दावों की असलियत उजागर कर दी। महज कुछ घंटों में 81.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो इस सीजन की सबसे भारी बारिश मानी जा रही है। इस बारिश ने पूरे शहर को जलमग्न कर दिया, जिससे प्रमुख सड़कें, रिहायशी इलाके और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।
हफ्तों की भीषण गर्मी के बाद अचानक आई राहत मुसीबत बनी
बीते कई हफ्तों से प्रयागराज उत्तर प्रदेश के सबसे गर्म शहरों में शुमार रहा था, जहां लंबे सूखे मौसम ने खेती को भारी नुकसान पहुंचाया था और बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी भारी दबाव डाला था। ऐसे में जब बुधवार को मानसून की द्रोणिका (ट्रफ) और मध्य भारत में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से अचानक तेज बारिश शुरू हुई, तो शुरुआत में इसे राहत के तौर पर देखा गया। लेकिन कुछ ही घंटों में यह राहत शहर के लिए बड़ी मुसीबत में बदल गई।
खुल्दाबाद, स्टेशन रोड, जॉर्जटाउन जैसे इलाके हुए जलमग्न
मौसम विभाग के मुताबिक सबसे तेज बारिश लगातार तीन घंटों तक बिना रुके होती रही, जिससे सूखी और तपी हुई जमीन तथा शहर की जल निकासी व्यवस्था पानी सोखने और निकालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई। इसके चलते खुल्दाबाद, स्टेशन रोड, जॉर्जटाउन, टैगोर टाउन और प्रयागराज जंक्शन के प्रवेश द्वार जैसे प्रमुख रिहायशी और व्यावसायिक इलाके पूरी तरह जलमग्न हो गए और वहां आवाजाही लगभग असंभव हो गई।
तापमान में भारी गिरावट, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर हुआ फेल
इस भारी बारिश से शहर के अधिकतम तापमान में भी बड़ी गिरावट देखी गई, जो घटकर 33.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया, जिससे भीषण गर्मी से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत जरूर मिली। लेकिन इस राहत की कीमत शहर के बुनियादी ढांचे को चुकानी पड़ी। जलजमाव ने साफ कर दिया कि शहर की जल निकासी व्यवस्था आज भी भारी बारिश का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है, चाहे विकास कार्यों के कितने भी दावे किए जाते रहे हों।
IMD ने जारी किया व्यापक अलर्ट
इस घटना के बाद भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर, पश्चिम और मध्य भारत में भारी बारिश, तेज हवाओं और आंधी-तूफान की व्यापक चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक गंगा के मैदानी इलाकों में मानसून की सक्रियता को देखते हुए आने वाले चार-पांच दिनों तक राज्य में बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसी क्रम में IMD ने प्रयागराज समेत राज्य के 28 जिलों के लिए भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट पहले ही जारी कर दिया था।
स्थानीय लोगों में प्रशासन के खिलाफ नाराजगी
जलभराव की इस स्थिति के बाद स्थानीय निवासियों में प्रशासन के खिलाफ गहरी नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। बार-बार होने वाली इस तरह की घटनाओं ने शहर के विकास कार्यों की गुणवत्ता और उनकी दीर्घकालिक योजना पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या
फिलहाल प्रशासन जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने के काम में जुटा है, और IMD के अलर्ट को देखते हुए आने वाले दिनों में भी सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। स्थानीय प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि वह सिर्फ तात्कालिक राहत कार्यों तक सीमित न रहकर, शहर की जल निकासी व्यवस्था में स्थायी सुधार की दिशा में भी ठोस कदम उठाए, ताकि हर मानसून में यही स्थिति दोबारा न बने।
स्कूली बच्चों और आम राहगीरों को हुई भारी परेशानी
जलभराव की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वालों और रोजमर्रा के कामकाज के लिए बाहर निकलने वाले आम नागरिकों को उठानी पड़ी। कई इलाकों में सड़कों पर घुटनों तक पानी भर जाने से दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच रास्ते में ही बंद हो गए, जिससे लंबा जाम लग गया। कुछ जगहों पर दुकानदारों को अपने प्रतिष्ठानों में घुसे पानी को निकालने के लिए घंटों मशक्कत करनी पड़ी, जिससे उनके व्यापार को भी नुकसान उठाना पड़ा।
पिछले वर्षों में भी दोहराई जा चुकी है यही स्थिति
यह पहला मौका नहीं है जब प्रयागराज में भारी बारिश के चलते ऐसी स्थिति बनी हो। बीते वर्षों में भी मानसून के दौरान शहर के कई हिस्सों में गंगा और यमुना का जलस्तर बढ़ने के साथ-साथ जलभराव की समस्या सामने आती रही है, जिसके चलते कई बार स्कूलों को भी अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक शहर के ड्रेनेज सिस्टम का व्यापक और वैज्ञानिक तरीके से नवीनीकरण नहीं किया जाता, तब तक हर मानसून में इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।





