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पुजारा बोले- रहाणे जैसा कप्तान मुश्किल से मिलता है

भारतीय टेस्ट टीम के अनुभवी बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे की कप्तानी, शांत स्वभाव और टीम भावना की जमकर सराहना की है। पुजारा ने 2020-21 बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान मेलबर्न टेस्ट में रहाणे के शतक को अपने करियर की सबसे यादगार पारियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि रहाणे के नेतृत्व और खिलाड़ियों पर भरोसे ने भारत की ऐतिहासिक सीरीज जीत में अहम भूमिका निभाई।

India Junction News Desk
1/8/2026
पुजारा बोले- रहाणे जैसा कप्तान मुश्किल से मिलता है

चेतेश्वर पुजारा ने अजिंक्य रहाणे की कप्तानी की तारीफ की

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी टेस्ट बल्लेबाज़ चेतेश्वर पुजारा ने पूर्व कप्तान अजिंक्य रहाणे की कप्तानी, व्यक्तित्व और टीम के प्रति उनके समर्पण की तारीफ की है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में पुजारा ने कहा कि अपने लंबे करियर में उन्होंने कई कप्तानों के साथ खेला, लेकिन रहाणे की नेतृत्व शैली सबसे अलग रही। उनके मुताबिक रहाणे हमेशा शांत रहते थे, खिलाड़ियों पर भरोसा रखते थे और टीम के हित को अपनी उपलब्धियों से ऊपर रखते थे। इसी कारण तमाम लंबे समय तक ड्रेसिंग रूम में एक सकारात्मक माहौल बना रहता था और खिलाड़ियों का आत्मविश्वास कम नहीं होता था।

एडिलेड की हार के बाद बदली टीम की सोच

पुजारा ने 2020-21 की ऐतिहासिक बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के बारे में बताया कि वह भारतीय क्रिकेट के सबसे कठिन दौरों में से एक था। एडिलेड टेस्ट में भारत की दूसरी पारी में सिर्फ 36 रन बने थे, जो टेस्ट क्रिकेट में भारतीय टीम के सबसे निराशाजनक प्रदर्शनों में गिना जाता है। इसके बाद विराट कोहली अपने पितृत्व अवकाश के कारण वापस लौट गए थे। उस समय क्रिकेट विशेषज्ञ और ऑस्ट्रेलियाई मीडिया लगभग यही मान रहे थे कि भारत इस सीरीज में वापसी नहीं कर पाएगा। लेकिन अजिंक्य रहाणे ने कप्तानी संभाली और पूरी टीम में नया आत्मविश्वास भर दिया। पुजारा ने कहा कि रहाणे ने खिलाड़ियों से केवल एक बात कही थी कि एक खराब मैच पूरी सीरीज नहीं तय करता है और अगर टीम अपने खेल पर भरोसा रखे तो वापसी हो सकती है।

मेलबर्न शतक को बताया सबसे यादगार

चेतेश्वर पुजारा के मुताबिक अगर उन्हें रहाणे की कोई एक पारी याद रखनी हो तो वह मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में खेली गई शतकीय पारी होगी। दूसरे टेस्ट में रहाणे ने 112 रन बनाकर भारत को मजबूत स्थिति में पहुंचाया और टीम में मनोबल भी बढ़ा दिया। पुजारा ने कहा कि वह एक शतक नहीं था, बल्कि भारतीय टीम के आत्मविश्वास की वापसी का प्रतीक था। उस समय टीम दबाव में थी, कई वरिष्ठ खिलाड़ी उपलब्ध नहीं थे और युवा खिलाड़ियों पर बड़ी जिम्मेदारी थी। ऐसे में कप्तान की वह पारी पूरी टीम के लिए प्रेरणा बनी। पुजारा का मानना है कि वह पारी भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा यादगार रहेगी।

रहाणे की दरियादिली के भी कायल हैं पुजारा

पुजारा ने रहाणे के स्वभाव और उनकी दरियादिली की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि रहाणे कभी अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड या उपलब्धियों के पीछे नहीं भागे। उनके लिए हमेशा टीम की जीत सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। चाहे कोई नया खिलाड़ी हो या अनुभवी क्रिकेटर, रहाणे सभी के साथ समान व्यवहार करते थे और हर खिलाड़ी को खुलकर खेलने की आजादी देते थे। ड्रेसिंग रूम में उनका व्यवहार बेहद विनम्र और सहयोगी रहता था। पुजारा ने कहा कि रहाणे ऐसे कप्तान हुए जो किसी खिलाड़ी की सफलता का पूरा श्रेय उसी खिलाड़ी को देते थे, जबकि हार की स्थिति में जिम्मेदारी खुद लेने से कभी पीछे नहीं हटते थे। यही गुण उन्हें एक बेहतरीन इंसान और शानदार लीडर बनाते हैं।

ऐतिहासिक सीरीज जीत में निभाई अहम भूमिका

पुजारा ने आगे कहा कि मेलबर्न टेस्ट की जीत के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास पूरी तरह बदल गया था। इसके बाद सिडनी टेस्ट ड्रॉ रहा और फिर गाबा टेस्ट में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को उसके सबसे मजबूत किले में हराकर 2-1 से सीरीज अपने नाम कर ली। यह जीत भारतीय टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है। पुजारा का मानना है कि इस ऐतिहासिक सफलता का सबसे बड़ा श्रेय रहाणे की शांत कप्तानी, सही फैसलों और खिलाड़ियों पर उनके भरोसे को जाता है। उन्होंने कहा कि उस दौरे पर रहाणे ने साबित कर दिया था कि नेतृत्व सिर्फआक्रामकता से नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और टीम पर विश्वास से भी किया जा सकता है।

शुभमन गिल पर भी जताया भरोसा

इंटरव्यू के दौरान पुजारा ने मौजूदा कप्तान शुभमन गिल की तारीफ की। उन्होंने कहा कि गिल अभी कप्तानी के शुरुआती दौर में हैं और उन्हें पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। जैसे महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, रोहित शर्मा और अजिंक्य रहाणे की अपनी-अपनी अलग कप्तानी शैली रही, उसी तरह शुभमन गिल भी अनुभव के साथ अपनी अलग पहचान बनाएंगे। पुजारा ने विश्वास जताया कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य मजबूत हाथों में है और आने वाले वर्षों में गिल टीम इंडिया को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकते हैं।

रहाणे की कप्तानी हमेशा रहेगी यादगार

अजिंक्य रहाणे अब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं, लेकिन 2020-21 ऑस्ट्रेलिया दौरे पर उनकी कप्तानी और मेलबर्न में खेली गई शतकीय पारी भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम अध्यायों में हमेशा याद रखी जाएगी। चेतेश्वर पुजारा की यह टिप्पणी भी उसी ऐतिहासिक दौर की याद दिलाती है, जब तमाम चुनौतियों और आलोचनाओं के बावजूद भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर इतिहास रचा था। पुजारा के मुताबिक रहाणे का योगदान सिर्फ आंकड़ों से नहीं, बल्कि उस विश्वास और नेतृत्व से भी मापा जाएगा जिसने टीम इंडिया को असंभव लगने वाली जीत दिलाई।

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