भारतीय नौसेना के सेल ट्रेनिंग शिप INS सुदर्शिनी ने पुर्तगाल में अपना पोर्ट कॉल पूरा कर लिया है और अब अगले बंदरगाह पर जा रहा है। यह जहाज भारतीय नौसेना के लोकायन-2026 अभियान के तहत एक लंबी समुद्री यात्रा पर है। इस अभियान के दौरान यह जहाज अलग-अलग देशों के बंदरगाहों पर रुककर समुद्री प्रशिक्षण और आदान-प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही भारत की समुद्री विरासत को भी प्रदर्शित कर रहा है। पुर्तगाल में जहाज का आगमन भी इसी अभियान का हिस्सा रहा। 22 अगस्त को जहाज लिस्बन में पहुंचा। यह इसके सात महीने लंबे अभियान का 15वां पोर्ट कॉल था। लिस्बन में जहाज के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने पुर्तगाली नौसेना के अधिकारियों, स्थानीय प्रशासन और वहां मौजूद भारतीय समुदाय के साथ कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग बढ़ाना था।
पुर्तगाल में हुई पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियां
INS सुदर्शिनी के चालक दल ने पुर्तगाल में पेशेवर बातचीत और क्रॉस-डेक विजिट जैसी गतिविधियों में भाग लिया। इन कार्यक्रमों में भारतीय और पुर्तगाली नौसेना के अधिकारियों ने समुद्री क्षेत्र से जुड़े अनुभव साझा किए। साथ ही सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से दोनों देशों की समुद्री परंपराओं को भी सामने रखा गया।
यात्रा प्रशिक्षुओं के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव है
जहाज पर मौजूद प्रशिक्षुओं के लिए यह यात्रा व्यावहारिक प्रशिक्षण का अच्छा मौका है। लंबी समुद्री यात्रा के दौरान उन्हें वास्तविक समुद्री परिस्थितियों में नौकायन, जहाज संचालन और टीमवर्क का अनुभव मिलता है। इस तरह INS सुदर्शिनी का अभियान केवल एक अंतरराष्ट्रीय यात्रा नहीं है, बल्कि नौसैनिक प्रशिक्षण और समुद्री कूटनीति का संयोजन है।
पोंटा डेलगाडा में भी रुका था
लिस्बन पहुंचने से पहले INS सुदर्शिनी ने पुर्तगाल के पोंटा डेलगाडा में भी पोर्ट कॉल किया था। वहां भारतीय और पुर्तगाली नौसेना के बीच पेशेवर बातचीत के साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। जहाज के चालक दल ने पोंटा डेलगाडा में भारत का स्वतंत्रता दिवस भी मनाया था।
आगे लिस्बन की ओर बढ़ा
इसके बाद INS सुदर्शिनी पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन के लिए रवाना हुआ। दोनों बंदरगाहों पर जहाज की मौजूदगी ने भारत और पुर्तगाल के बीच समुद्री संपर्क को मजबूत किया और भारतीय नौसेना की समुद्री परंपराओं को प्रदर्शित करने का अवसर दिया।
19 दिन की ट्रांस-अटलांटिक यात्रा पूरी की
INS सुदर्शिनी की मौजूदा यात्रा के दौरान जहाज ने अटलांटिक महासागर की लंबी यात्रा भी पूरी की। अगस्त में यह जहाज अमेरिका के बोस्टन से 19 दिन की ट्रांस-अटलांटिक यात्रा के बाद पोंटा डेलगाडा पहुंचा था। यह जहाज की अटलांटिक महासागर की दूसरी क्रॉसिंग थी। इस दौरान INS सुदर्शिनी ने 15 हजार से अधिक नॉटिकल मील की दूरी तय की।
सीएल 250 समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया
इससे पहले जहाज ने अमेरिका में आयोजित SAIL 250 समारोहों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। बोस्टन, न्यूयॉर्क, बाल्टीमोर और नॉरफोक में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान INS सुदर्शिनी की मौजूदगी ने भारत की समुद्री विरासत और नौसैनिक परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया।
भारत की समुद्री विरासत का संदेश
तीन मस्तूलों वाला INS सुदर्शिनी भारतीय नौसेना के महत्वपूर्ण सेल ट्रेनिंग शिप में शामिल है। इसका इस्तेमाल नौसैनिक प्रशिक्षुओं को पारंपरिक नौकायन और समुद्री कौशल का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता है। लंबी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान प्रशिक्षुओं को अलग-अलग समुद्री परिस्थितियों में काम करने और जहाज संचालन की बारीकियां सीखने का अवसर मिलता है।लोकायन-2026 अभियान के जरिए भारतीय नौसेना समुद्री प्रशिक्षण के साथ भारत की समुद्री विरासत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का संदेश भी दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचा रही है। अलग-अलग देशों में पोर्ट कॉल के दौरान स्थानीय नौसेनाओं के साथ बातचीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने में मदद करते हैं। पुर्तगाल से अगले पड़ाव के लिए रवाना होने के साथ INS सुदर्शिनी ने अपनी लंबी यात्रा का एक और चरण पूरा कर लिया है। आने वाले समय में जहाज अभियान के तहत अन्य निर्धारित बंदरगाहों तक पहुंचेगा। इस दौरान भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं को समुद्री परिस्थितियों में प्रशिक्षण प्राप्त करने के साथ विभिन्न देशों की नौसैनिक परंपराओं और संस्कृतियों को समझने का अवसर मिलेगा। INS सुदर्शिनी की यह यात्रा भारत की बढ़ती समुद्री पहुंच और नौसैनिक कूटनीति को भी दर्शाती है। जहाज की अंतरराष्ट्रीय यात्रा के जरिए भारत मित्र देशों के साथ पेशेवर सहयोग बढ़ाने के साथ अपनी समुद्री क्षमताओं और विरासत को भी दुनिया के सामने रख रहा है। फिलहाल पुर्तगाल में अपना प्रवास पूरा करने के बाद INS सुदर्शिनी अगले पड़ाव की ओर बढ़ चुका है और लोकायन-2026 अभियान के तहत उसकी समुद्री यात्रा जारी है।





