उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश के संभल जिले से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। इस वीडियो में संभल के सर्किल ऑफिसर (CO) कुलदीप कुमार नमाज़ और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सख्त चेतावनी देते नजर आ रहे हैं। उनके बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
क्या कहा संभल के CO कुलदीप कुमार ने
दरअसल, अलविदा जुमे और जुमे की नमाज़ से पहले प्रशासन की ओर से शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बैठक की गई थी। इसी दौरान संभल के CO कुलदीप कुमार ने कहा कि भारत में कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर किसी को ईरान के मुद्दे को लेकर इतनी ही चिंता है, तो सरकार जो जहाज़ भेज रही है वहां फंसे भारतीयों को वापस लाने के लिए, उसी जहाज़ से ईरान चले जाएं और वहां जाकर उनकी तरफ से लड़ाई लड़ें, फिर वापस आ जाएं। CO कुलदीप कुमार ने कहा कि हम हिंदुस्तानी हैं, हम भारतीय हैं और यहां शांति और कानून व्यवस्था के साथ रह रहे हैं। दूसरे देशों के बीच जो भी युद्ध या विवाद चल रहा है, उसका असर भारत की कानून व्यवस्था पर नहीं पड़ने दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि अलविदा या जुमे की नमाज़ के दौरान किसी भी देश के समर्थन या विरोध में नारेबाजी नहीं होनी चाहिए। अगर किसी ने ऐसा किया और उससे माहौल बिगड़ा, तो प्रशासन सख्त कार्रवाई करेगा।
ओवैसी का तीखा पलटवार
संभल CO के बयान का वीडियो वायरल होने के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। ओवैसी ने कहा, “ये मुल्क आपके बाप का नहीं है। हिंदुस्तान का अपना संविधान है और Article 19 हमें Freedom of Expression का Fundamental Right देता है।” उन्होंने पुलिस अधिकारी को संबोधित करते हुए कहा कि “सुनिए DSP साहब, आप इजरायल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की जुबान में बात कर रहे हैं।” ओवैसी ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और यहां हर नागरिक को संविधान के तहत अपनी बात रखने का अधिकार है।
क्यों बढ़ा विवाद
इस बयान के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। कुछ लोग प्रशासन के बयान को कानून व्यवस्था बनाए रखने की चेतावनी बता रहे हैं, जबकि विपक्षी दल इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी से जोड़कर देख रहे हैं।
कानून व्यवस्था बनाम अभिव्यक्ति की आज़ादी
पूरे मामले में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि उनका मकसद केवल शांति व्यवस्था बनाए रखना है और किसी भी तरह की नारेबाजी से माहौल खराब न हो, यह सुनिश्चित करना है।
वहीं दूसरी तरफ विपक्ष का कहना है कि भारत का संविधान नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और किसी अधिकारी को इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।





