सोमवार, 10 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार करने के बाद मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। बीएसई सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 78,542.44 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 24,584 के स्तर पर बंद हुआ। हालांकि टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बढ़त को बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों की कमजोरी ने काफी हद तक बेअसर कर दिया।
एशियाई बाजारों से मिला सहारा
सोमवार को भारतीय बाजार ने एशियाई बाजारों में आई तेजी के सहारे मजबूत शुरुआत की थी। कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुख देखा गया, जिससे जापान के निक्केई 225 में करीब 2 प्रतिशत की तेजी आई, वहीं हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सैंग और शंघाई कंपोजिट में भी बढ़त दर्ज हुई। सेंसेक्स ने कारोबार की शुरुआत 78,501.59 के स्तर पर की, जो पिछले बंद स्तर 78,499.17 से थोड़ा ऊपर था।
दिनभर सीमित दायरे में रहा कारोबार
शुरुआती कारोबार में बाजार लाल निशान में भी गया, जहां BSE मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स नकारात्मक क्षेत्र में फिसल गए थे। दोपहर के सत्र में सेंसेक्स करीब 39 अंक गिरकर 78,460.35 तक भी पहुंचा, लेकिन कारोबार के आखिरी घंटों में बाजार ने रिकवरी दिखाते हुए हल्की बढ़त के साथ बंद होने में कामयाबी हासिल की। निफ्टी बैंक इंडेक्स भी लगभग स्थिर रहा, जो पूरे दिन के कारोबार में सतर्क रुख को दर्शाता है।
टाइटन, ICICI बैंक और SBI रहे टॉप गेनर
सेंसेक्स की टॉप 30 कंपनियों में टाइटन, ICICI बैंक और SBI शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा फायदे में रहे, जिनमें टाइटन ने 1 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की। इसके अलावा HCL टेक और इंफोसिस जैसे टेक्नोलॉजी शेयरों में भी अच्छी तेजी देखी गई, जिसने बाजार को सहारा देने में अहम भूमिका निभाई।
बजाज फाइनेंस में बड़ी गिरावट
दूसरी तरफ बजाज फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई, जो 1 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। इस गिरावट के पीछे मुख्य वजह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का एक मसौदा प्रस्ताव बताया जा रहा है, जिसमें कुछ रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स पर संभावित प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई है। इसके अलावा भारती एयरटेल, NTPC, अल्ट्राटेक सीमेंट और इंडिगो के शेयर भी नुकसान में रहे। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU बैंक इंडेक्स) में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जो व्यापक बिकवाली को दर्शाता है।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का रुख
आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 7 अगस्त 2026 को ₹480.24 करोड़ के शेयर खरीदे, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹235.56 करोड़ की खरीदारी की। इससे साफ है कि दोनों तरह के निवेशकों का रुख फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है, हालांकि बाजार में सतर्कता का माहौल अब भी बरकरार है। इंडिया VIX, जो बाजार की अस्थिरता को मापने वाला सूचकांक है, में भी करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो निवेशकों के बीच कुछ सतर्कता को दर्शाता है।
आगे क्या
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू कॉर्पोरेट नतीजों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। शुक्रवार को आई 0.58 प्रतिशत की गिरावट की भरपाई करते हुए सोमवार का यह प्रदर्शन बाजार के लिए राहत भरा जरूर रहा, लेकिन बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में जारी कमजोरी को देखते हुए विशेषज्ञ आने वाले सत्रों में भी उतार-चढ़ाव भरे कारोबार की उम्मीद जता रहे हैं।
छोटे निवेशकों के लिए क्या मायने
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि इस तरह के सीमित दायरे वाले कारोबार में छोटे निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। जब तक बाजार किसी स्पष्ट दिशा में मजबूती से आगे नहीं बढ़ता, तब तक सेक्टर-विशेष उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में विविधता बनाए रखनी चाहिए, ताकि किसी एक सेक्टर में आई गिरावट का व्यापक असर कम से कम हो सके।
बैंकिंग सेक्टर पर बना रहेगा दबाव
RBI के रिवॉल्विंग क्रेडिट प्रोडक्ट्स से जुड़े मसौदा प्रस्ताव का असर आने वाले दिनों में भी बैंकिंग और NBFC सेक्टर के शेयरों पर देखा जा सकता है। बाजार जानकारों के मुताबिक जब तक इस प्रस्ताव की अंतिम रूपरेखा स्पष्ट नहीं होती, तब तक इस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे इस मामले में आने वाले RBI के आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर करीबी नजर बनाए रखें।



