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दो साल बाद टूटी चुप्पी: शेख हसीना ने दिल्ली से किया बड़ा ऐलान, कहा- 'दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश'

अगस्त 2024 में सत्ता से बेदखल होने के दो साल बाद शेख हसीना ने 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने साफ कहा कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी — भले ही उन्हें जेल जाना पड़े या जान का खतरा हो। ढाका की एक अदालत पहले ही उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुना चुकी है। भारत सरकार ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग बताया, जबकि बांग्लादेश ने इस पर तीखी नाराजगी जताई है।

India Junction News Desk
5/8/2026
दो साल बाद टूटी चुप्पी: शेख हसीना ने दिल्ली से किया बड़ा ऐलान, कहा- 'दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश'

दो साल बाद टूटी चुप्पी: शेख हसीना ने दिल्ली से किया बड़ा ऐलान, कहा- 'दिसंबर में लौटूंगी बांग्लादेश'

संक्षेप में: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने सत्ता से बेदखल होने के दो साल बाद 5 अगस्त 2026 को नई दिल्ली से पहली बार वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि वे दिसंबर 2026 में बांग्लादेश लौटेंगी, भले ही उन्हें जेल जाना पड़े या जान का खतरा हो। इस बयान से भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नया तनाव खड़ा हो गया है।

दो साल बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति

अगस्त 2024 में छात्रों के व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद सत्ता से बेदखल होकर भारत में शरण लेने वाली शेख हसीना ने बुधवार को अपनी बेदखली की दूसरी बरसी पर पहली बार सार्वजनिक तौर पर मीडिया को संबोधित किया। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के मथुरा रोड स्थित सर मार्क टली ऑडिटोरियम में फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब, साउथ एशिया द्वारा आयोजित किया गया, जिसमें हसीना वर्चुअल तरीके से शाम 6 बजे से 7:30 बजे तक जुड़ी रहीं।

इस कार्यक्रम में उनके बेटे साजिब वाजेद जॉय, पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नौफेल, पूर्व क्रिकेटर और अवामी लीग नेता शाकिब अल हसन, पूर्व राजनयिक अमीनुल हक पोलाश समेत कई अन्य नेता भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का शीर्षक 'शेख हसीना की होमकमिंग' रखा गया था, जिससे पहले से ही यह संकेत मिल रहा था कि इसमें उनकी वतन वापसी को लेकर बड़ी घोषणा हो सकती है।

'दिसंबर में लौटूंगी, चाहे जो भी हो'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान 78 वर्षीय हसीना ने साफ शब्दों में कहा कि वे बांग्लादेश जरूर लौटेंगी और यह वापसी सत्ता की चाह से जुड़ी नहीं है। उन्होंने कहा, "भारत हमेशा से एक दोस्त देश रहा है, लेकिन मैं अपने देश वापस जाना चाहती हूं, यह सरकार का मामला नहीं है।" हसीना ने बताया कि वे दिसंबर के महीने में लौटना चाहती हैं, क्योंकि यह महीना बांग्लादेश के लिए 'विजय का महीना' माना जाता है।

उन्होंने आगे कहा कि वे लोकतंत्र में विश्वास रखती हैं, और यही वजह है कि वे वापस लौटना चाहती हैं। हसीना ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी की जीत के प्रतीकों को हटा दिया गया है, और वे उन्हें वापस अपने देश में हासिल करना चाहती हैं। इससे पहले जुलाई में उन्होंने AFP से बातचीत में कहा था, "मुझे मारा जा सकता है, गिरफ्तार किया जा सकता है, जेल भेजा जा सकता है। मुझे अपने भाग्य का पूरा अंदाजा है। फिर भी मैं वापस जाना चाहती हूं क्योंकि मेरे लोग मुझे बुला रहे हैं।"

मौत की सजा के बावजूद वापसी का फैसला क्यों

गौरतलब है कि ढाका की एक अदालत ने पिछले साल नवंबर में हसीना को 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और प्रदर्शनकारियों की मौतों से जुड़े मामलों में अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई थी। इसके बावजूद उनका वतन लौटने का फैसला राजनीतिक विश्लेषकों के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। मनोहर पर्रिकर इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस की शोधकर्ता स्मृति पटनायक के मुताबिक, हसीना की यह घोषणा मुख्य रूप से अवामी लीग कार्यकर्ताओं को फिर से संगठित करने और पार्टी की मौजूदगी बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

फिलहाल अवामी लीग बांग्लादेश में आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत राजनीतिक गतिविधियों से प्रतिबंधित है, और फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में पार्टी हिस्सा तक नहीं ले सकी थी। इस चुनाव में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो-तिहाई बहुमत के साथ जीत हासिल की थी।

भारत ने खुद को किया अलग, बांग्लादेश नाराज

इस कार्यक्रम को लेकर भारत सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इसका इससे कोई लेना-देना नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा था कि यह कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था द्वारा आयोजित किया जा रहा है, और सरकार का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है, न ही वह इसमें व्यक्त किए गए किसी विचार का समर्थन करती है।

वहीं बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने इस कार्यक्रम को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह इस बात से 'हैरान और स्तब्ध' है कि भारत की धरती से हसीना को सार्वजनिक तौर पर बोलने की इजाजत दी गई। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी इससे पहले कहा था कि ढाका भारत के साथ रिश्ते खराब नहीं करना चाहता, लेकिन उम्मीद जताई थी कि भारत उनकी चिंताओं को समझेगा।

आगे क्या हो सकता है

हसीना की इस घोषणा के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों पर इसका क्या असर पड़ता है, यह आने वाले महीनों में साफ होगा। बांग्लादेश पहले से ही भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है, और अब उनकी दिसंबर में वापसी की घोषणा के बाद यह मुद्दा और गरमा सकता है। दूसरी ओर, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या हसीना वाकई दिसंबर में बांग्लादेश लौटती हैं, और अगर लौटती हैं तो वहां की मौजूदा सरकार व अदालतें उनके खिलाफ क्या कदम उठाती हैं।

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