भारतीय एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा की सफलता ने देश के युवाओं को भाला फेंक जैसे खेलों की ओर आकर्षित किया है। झारखंड के गुमला जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर महिला भाला फेंक में अपनी पहचान बनाने वाली युवा खिलाड़ी **शिल्पा कुमारी** भी नीरज चोपड़ा से बेहद प्रभावित हैं। शिल्पा का सपना है कि वह नीरज चोपड़ा की तरह ओलंपिक पदक जीतकर देश का नाम रोशन करें। शिल्पा कुमारी फिलहाल महिला अंडर-17 भाला फेंक की राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी हैं और उन्हें भारत की उभरती हुई प्रतिभाओं में गिना जा रहा है। किसान परिवार से आने वाली शिल्पा के लिए खेल की दुनिया में यहां तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उनकी प्रतिभा और मेहनत ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है।
नीरज चोपड़ा को देखकर बदली जिंदगी
शिल्पा के लिए नीरज चोपड़ा की टोक्यो ओलंपिक 2020 की ऐतिहासिक जीत एक निर्णायक पल साबित हुई। उन्होंने गांव की चौपाल में अपने पड़ोसियों के साथ टीवी पर नीरज चोपड़ा को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतते हुए देखा था। नीरज की जीत और गांव में उनके सम्मान में मनाया गया जश्न शिल्पा के मन में गहरी छाप छोड़ गया। इसके बाद उन्होंने भाला फेंक को अपना खेल बनाने का फैसला किया। शिल्पा ने कहा कि नीरज चोपड़ा की जीत ने उन्हें इस खेल को अपनाने के लिए प्रेरित किया और तभी उन्होंने तय किया कि एक दिन वह भी ओलंपिक पदक जीतने की कोशिश करेंगी। उनका कहना है कि वह नीरज चोपड़ा की तरह बनना चाहती हैं और अपना ओलंपिक पदक उन्हें समर्पित करना चाहती हैं।
किसान परिवार से निकलकर खेल की दुनिया तक
शिल्पा कुमारी झारखंड के गुमला जिले के एक दूरदराज गांव से आती हैं। उनके माता-पिता किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि शिल्पा के खेल करियर का पूरा खर्च आसानी से उठाया जा सके। ऐसे समय में भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) की मदद उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई। रांची स्थित SAI सेंटर में प्रशिक्षण, खेल उपकरण, डाइट और अन्य सुविधाओं ने शिल्पा को अपनी प्रतिभा निखारने का मौका दिया। उनके कोच बिनोद सिंह ने बताया कि करीब तीन साल पहले एक ट्रायल के दौरान उन्होंने शिल्पा की प्राकृतिक प्रतिभा को पहचाना था। उस समय शिल्पा इस खेल में बिल्कुल नई थीं, लेकिन उनकी थ्रो करने की क्षमता ने कोच को प्रभावित किया।
55.62 मीटर की थ्रो से बनाई पहचान
शिल्पा ने साल 2025 में 69वें नेशनल स्कूल गेम्स के दौरान 55.62 मीटर की थ्रो कर महिला U-17 वर्ग में नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया था। यह प्रदर्शन भारत के U-18 राष्ट्रीय रिकॉर्ड 55.19 मीटर से भी बेहतर था। हालांकि, उनकी 55.62 मीटर की थ्रो को आधिकारिक रिकॉर्ड के तौर पर मान्यता नहीं मिली, क्योंकि जिस प्रतियोगिता में यह प्रदर्शन हुआ था, उसे World Athletics की आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त नहीं थी।
इसके बाद 2025 जूनियर नेशनल्स में शिल्पा ने 45.90 मीटर की थ्रो के साथ पांचवां स्थान हासिल किया। यह उनका आधिकारिक व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है और पिछले आधिकारिक प्रदर्शन की तुलना में करीब 10 मीटर का सुधार था।
अब Youth Olympics पर नजर
शिल्पा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती और मौका 2026 Summer Youth Olympics है, जिसका आयोजन डकार, सेनेगल में 31 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक होना है। शिल्पा का तत्काल लक्ष्य इस प्रतियोगिता में पोडियम फिनिश हासिल करना है। हालांकि, उनकी नजर सिर्फ युवा स्तर की सफलता पर नहीं है। उनका अंतिम लक्ष्य सीनियर स्तर पर ओलंपिक पदक जीतना है। शिल्पा का मानना है कि अभी उन्हें लंबा सफर तय करना है और लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार करना होगा। उनका सपना है कि आने वाले वर्षों में वह भारत की शीर्ष महिला जैवलिन थ्रोअर बनें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतें।
नीरज से मिली प्रेरणा, अब खुद इतिहास रचने की तैयारी
नीरज चोपड़ा ने भारत में जैवलिन थ्रो को नई पहचान दिलाई है। उनकी ओलंपिक सफलता के बाद देश के कई युवा इस खेल को करियर के तौर पर देखने लगे हैं। शिल्पा कुमारी की कहानी भी इसी बदलाव की एक मिसाल है। गांव की चौपाल पर नीरज चोपड़ा का स्वर्ण पदक जीतना देखने वाली शिल्पा अब खुद ओलंपिक पदक का सपना देख रही हैं। किसान परिवार की इस बेटी की नजर फिलहाल Youth Olympics के पोडियम पर है, लेकिन उनकी मंजिल इससे भी आगे है—ओलंपिक पदक और देश के लिए गौरव।
शिल्पा ने साफ कहा है कि वह अपना ओलंपिक पदक नीरज चोपड़ा को समर्पित करना चाहती हैं। अब देखना होगा कि आने वाले वर्षों में यह युवा खिलाड़ी अपने सपने को कितनी ऊंचाई तक ले जाती है।





