आगरा का ताज महल सिर्फ अपनी सफेद संगमरमरी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी इंजीनियरिंग के गहरे राज़ों के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है। इन्हीं में से एक है इसकी चार मीनारों पर लगा एक खास काला पत्थर, जो पिछले करीब 80 सालों से मीनारों के मामूली झुकाव पर लगातार नजर रखे हुए है। यह पत्थर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के लिए एक तरह के प्राकृतिक 'मॉनिटरिंग सिस्टम' की तरह काम करता है।
जानबूझकर बनाई गई हैं झुकी हुई मीनारें
ताज महल की चारों मीनारें दिखने में पूरी तरह सीधी लगती हैं, लेकिन असल में इन्हें मूल ढांचे से थोड़ा बाहर की ओर झुकाकर बनाया गया है। यह कोई निर्माण संबंधी खामी नहीं, बल्कि मुगलकालीन वास्तुकारों की एक सोची-समझी रणनीति थी। मान्यता है कि अगर कभी भूकंप या किसी और वजह से मीनारें गिरें, तो वे मुख्य मकबरे पर न गिरकर बगीचे और यमुना नदी की तरफ गिरें, जिससे ताज महल का मुख्य ढांचा सुरक्षित बना रहे। यही वजह है कि इन मीनारों के झुकाव पर बरसों से करीबी नजर रखी जाती रही है।
कैसे काम करता है यह काला पत्थर
ASI के विशेषज्ञों के मुताबिक, मीनारों में लगा यह काला पत्थर एक तरह का संदर्भ बिंदु (रेफरेंस पॉइंट) है, जिसकी मदद से समय-समय पर मीनारों की स्थिति और झुकाव को मापा जाता है। दशकों से चली आ रही इस निगरानी प्रक्रिया के जरिए विशेषज्ञ यह पता लगाते हैं कि मीनारों की स्थिति में कोई असामान्य बदलाव तो नहीं आ रहा। अगर झुकाव तय सीमा से ज्यादा बढ़ता दिखे, तो समय रहते जरूरी संरक्षण कार्य शुरू किया जा सके। यह तरीका आधुनिक सेंसर तकनीक आने से पहले के दौर की एक सरल लेकिन असरदार निगरानी व्यवस्था मानी जाती है।
मुगलकालीन इंजीनियरिंग की मिसाल
इतिहासकारों और वास्तुकला विशेषज्ञों के मुताबिक ताज महल की यह डिजाइन तकनीक उस दौर की इंजीनियरिंग समझ की एक बेहतरीन मिसाल है। मीनारों का आधार अष्टकोणीय है, और इनके ऊपर एक पतला बेलनाकार ढांचा है, जो सफेद संगमरमर के टुकड़ों से बना है। इन संगमरमर के टुकड़ों के जोड़ों को छिपाने और मजबूती देने के लिए ही बीच-बीच में काले पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था, जो आज मॉनिटरिंग पॉइंट के तौर पर भी काम आ रहे हैं।
समय-समय पर उठते रहे हैं झुकाव को लेकर सवाल
ताज महल के मीनारों के झुकाव को लेकर पहले भी कई बार चिंता जताई जा चुकी है। कुछ साल पहले एक सांसद ने दावा किया था कि नींव कमजोर होने के कारण ताज महल को खतरा हो सकता है, हालांकि ASI के वरिष्ठ पुरातत्वविदों ने उस समय इन दावों को खारिज करते हुए कहा था कि नियमित जांच में ऐसा कोई खतरा सामने नहीं आया है। ASI लगातार ताज महल की मीनारों, गुंबद और संगमरमर की सतह की सफाई व संरक्षण का काम करता रहता है, ताकि इस विश्व धरोहर स्थल को सुरक्षित रखा जा सके।
हर साल लाखों पर्यटकों की पसंद
यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ताज महल हर साल लाखों देशी-विदेशी सैलानियों को आकर्षित करता है। मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में इसे बनवाया था, और आज यह दुनिया के सात अजूबों में गिना जाता है। इसकी बारीक नक्काशी, संगमरमर की जड़ाई और वास्तुकला की गहराई हर साल इतिहास और कला में रुचि रखने वाले लोगों को अपनी ओर खींचती है। मीनारों में छिपा यह काला पत्थर भी इसी बारीक इंजीनियरिंग की एक और मिसाल है, जिसके बारे में ज्यादातर पर्यटकों को जानकारी तक नहीं होती।
आगे भी जारी रहेगी निगरानी
ASI अधिकारियों के मुताबिक ताज महल की मीनारों की निगरानी और संरक्षण का काम आगे भी इसी तरह जारी रहेगा। समय-समय पर होने वाली इस जांच से न सिर्फ मीनारों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि यह भी पक्का किया जाता है कि यह ऐतिहासिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उतनी ही सुरक्षित और भव्य बनी रहे, जितनी यह आज है।





