पूर्व तहलका संपादक तरुण तेजपाल को 2013 के एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने दोषी करार देते हुए 10 साल की सश्रम कैद और ₹10 लाख से ज्यादा के जुर्माने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने 2021 में सेशंस कोर्ट द्वारा उन्हें बरी किए जाने के फैसले को पलट दिया। तेजपाल को सरेंडर करने के लिए चार हफ्तों का समय दिया गया है।
13 साल पुराना मामला, कई मोड़ों से गुजरा
यह मामला नवंबर 2013 का है, जब गोवा में तहलका पत्रिका के 'थिंकफेस्ट' कार्यक्रम के दौरान एक जूनियर महिला सहकर्मी ने आरोप लगाया था कि तेजपाल ने एक लग्जरी होटल की लिफ्ट के भीतर उनके साथ 7 और 8 नवंबर को दुर्व्यवहार किया। गोवा पुलिस ने 23 नवंबर 2013 को मामला दर्ज किया और 30 नवंबर को तेजपाल को गिरफ्तार कर लिया गया, जिसके बाद उनकी अग्रिम जमानत याचिका भी खारिज हो गई थी। बाद में जुलाई 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
मामले की सुनवाई 2017 में शुरू हुई। मई 2021 में मापुसा की सेशंस कोर्ट ने तेजपाल को यह कहते हुए बरी कर दिया था कि अभियोजन पक्ष आरोप को संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। इस फैसले की उस वक्त काफी आलोचना हुई थी, क्योंकि अदालत ने पीड़िता के व्यवहार पर सवाल उठाए थे, जिसे कानूनी जानकारों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने अनुचित बताया था। गोवा सरकार ने इस बरी होने के फैसले के खिलाफ 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
गुरुवार को जस्टिस नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसांडेकर की खंडपीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(f), 376(2)(k), 354A और 354B के तहत दोषी करार दिया। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि निचली अदालत ने गलत तरीके से आरोपी के आचरण के बजाय पीड़िता के घटना के बाद के व्यवहार और पृष्ठभूमि पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया था।
सुनवाई के दौरान गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अधिकतम सजा देने की मांग करते हुए कहा कि इससे यह मजबूत संदेश जाएगा कि 'ना का मतलब ना ही होता है।' वहीं तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा ने न्यूनतम सजा की मांग रखी। सुनवाई के दौरान अदालत में मौजूद तेजपाल ने खुद को 'राजनीतिक शिकार' बताते हुए नरमी की अपील की और अपनी दो बेटियों का हवाला भी दिया।
10 साल की सजा और भारी जुर्माना
अंततः अदालत ने तेजपाल को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई, साथ ही उन पर ₹10 लाख से अधिक का जुर्माना भी लगाया गया। सभी सजाएं एक साथ (कंकरंट) चलेंगी। बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित पुलिस इंस्पेक्टर को जुर्माने की वसूली को लेकर अदालत में अनुपालन रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने तेजपाल के आग्रह पर उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के लिए चार हफ्तों की मोहलत भी दी है।
अपील का जिक्र, सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
तेजपाल के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। कानूनी जानकारों के मुताबिक यह मामला आगे भी लंबा खिंच सकता है, क्योंकि तेजपाल की टीम शीर्ष अदालत के सामने सजा को चुनौती देने और जमानत की मांग रखने की योजना बना रही है।
पीड़िता को माफी वाला ईमेल बना अहम सबूत
अपील की सुनवाई के दौरान एक अहम सबूत के तौर पर तेजपाल द्वारा घटना के बाद पीड़िता को भेजा गया माफीनामा ईमेल पेश किया गया। गोवा सरकार का कहना था कि निचली अदालत ने सबूतों को गलत तरीके से पढ़ा था और पीड़ितों के व्यवहार को लेकर पुरानी और गलत धारणाओं पर भरोसा किया था। हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में इस बिंदु पर सहमति जताई।
मामले का व्यापक असर
तरुण तेजपाल भारतीय पत्रकारिता जगत के एक जाना-पहचाना नाम रहे हैं, और यह मामला शुरू से ही देश-विदेश में बड़ी सुर्खियों में रहा। कानूनी और महिला अधिकार क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यह फैसला #MeToo जैसे आंदोलनों के दौर में यौन उत्पीड़न के मामलों में अदालती रुख को समझने के लिहाज से भी अहम है, और आने वाले समय में इसी तरह के मामलों की सुनवाई पर इसका असर पड़ सकता है।





