भारतीय कुश्ती के चर्चित खिलाड़ियों में शामिल विनेश फोगाट का सफर उपलब्धियों, संघर्ष और विवादों से भरा है। हरियाणा के एक परिवार से आने वाली विनेश ने बचपन से ही कुश्ती को देखा और इस खेल को अपना करियर बनाया। वह दिग्गज पहलवान महावीर सिंह फोगाट से संबंधित हैं, और उनकी चचेरी बहनें गीता फोगाट और बबीता फोगाट भी देश को कुश्ती में नाम रोशन कर चुकी हैं। विनेश ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और Commonwealth Games में लगातार तीन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड
विनेश फोगाट ने 2014 के ग्लासगो Commonwealth Games में 48 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक हासिल किया। 2018 में गोल्ड कोस्ट Commonwealth Games में, उन्होंने 50 किलोग्राम भार वर्ग में फिर से स्वर्ण पदक जीता। 2022 में बर्मिंघम Commonwealth Games में, 53 किलोग्राम भार वर्ग में गोल्ड जीतकर, उन्होंने लगातार तीसरी बार Commonwealth Games चैंपियन बनकर इतिहास रचा। इस तरह, विनेश ने तीन अलग-अलग भार वर्गों में स्वर्ण जीतकर अपनी क्षमता और निरंतरता दिखाई। विनेश की सफलताएँ Commonwealth Games से आगे बढ़ीं। 2018 के जकार्ता Asian Games में, उन्होंने 50 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। 2019 और 2022 में World Wrestling Championships में, उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल भी जीते। 2021 Asian Wrestling Championships में भी उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किया।
चोटों से लेकर ओलंपिक तक संघर्ष
विनेश का करियर सिर्फ जीत से नहीं बना। 2016 के रियो ओलंपिक में, क्वार्टर फाइनल में घुटने की गंभीर चोट लगी और उन्हें मुकाबले से बाहर होना पड़ा। फिर उन्होंने वापसी की और 2018 में Commonwealth Games और Asian Games में अच्छा प्रदर्शन कर अपनी स्थिति फिर से मजबूत की। उनके करियर में चोटों के साथ-साथ अलग-अलग भार वर्गों में मुकाबला करने की चुनौती भी रही। 2024 के पेरिस ओलंपिक में, विनेश ने 50 किलोग्राम भार वर्ग में पहले दौर में टोक्यो ओलंपिक की चैंपियन Yui Susaki को हराया। बाद में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में जीत कर, वह Olympic final में पहुँचने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। लेकिन गोल्ड मेडल मैच से पहले दूसरे वजन जाँच में, उनका वजन सीमा से लगभग 100 ग्राम अधिक पाया गया और उन्हें प्रतियोगिता से अयोग्य घोषित कर दिया गया।
Paris Olympics विवाद ने बदली कहानी
विनेश ने इस फैसले के खिलाफ Court of Arbitration for Sport, यानी CAS, में अपील की और संयुक्त Silver Medal देने की मांग की। CAS ने अपील खारिज कर दी। इसके बाद, विनेश ने भावुक होकर कुश्ती से संन्यास का ऐलान किया। 2023 में, विनेश का नाम पहलवानों के आंदोलन के कारण भी सुर्खियों में रहा। उन्होंने और अन्य शीर्ष पहलवानों ने Wrestling Federation of India के नेतृत्व के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस आंदोलन ने भारतीय खेल व्यवस्था, खिलाड़ियों की सुरक्षा और महासंघों की जवाबदेही पर देशभर में बहस छेड़ दी।
कुश्ती के बाद राजनीति में कदम
पेरिस ओलंपिक के बाद, विनेश ने राजनीति में कदम बढ़ाया। वह कांग्रेस में शामिल होकर हरियाणा विधानसभा चुनाव लड़ा और जुलाना सीट से जीत हासिल की। इसके बाद वह विधायक बनकर राजनीतिक सफर आगे बढ़ा। इस प्रकार, अखाड़े से लेकर विधानसभा तक उनका सफर भारतीय खेल और राजनीति दोनों में चर्चा का विषय बना।
विनेश की कहानी खास है क्योंकि उन्होंने कई बार मुश्किल परिस्थितियों में वापसी की। चोट, वजन वर्ग बदलने की चुनौती, अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का दबाव और विवादों के बावजूद, उन्होंने कई बड़ी उपलब्धियां हासिल कीं। तीन Commonwealth Games Gold, Asian Games Gold और World Championships के पदक उनके शानदार करियर को दर्शाते हैं।
दिसंबर 2025 में, विनेश ने फिर से प्रतिस्पर्धी कुश्ती में लौटने और LA 2028 ओलंपिक को लक्ष्य बनाने का फैसला किया। इससे पता चलता है कि उनका खेल के प्रति जुनून अभी भी जीवित है। विनेश फोगाट का सफर दिखाता है कि एक खिलाड़ी का जीवन सिर्फ पदकों से नहीं बनता। संघर्ष, चोट, विवाद और कठिन फैसले भी उसके सफर का हिस्सा हैं। कुश्ती के अखाड़े से लेकर राजनीति तक, विनेश ने हर मोर्चे पर अपनी पहचान बनाई है। उनकी कहानी आज भी भारतीय खेल जगत में प्रेरणा और बहस का विषय है।





