भारत में सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन के क्षेत्र में कुशल युवाओं की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से चलाया जा रहा चिप्स से स्टार्टअप्स कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पहल के तहत अब तक 68,000 से अधिक छात्रों को सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इस कार्यक्रम के माध्यम से 85,000 उद्योग-तैयार इंजीनियरों को तैयार करना है।
यह कार्यक्रम भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसका उद्देश्य सिर्फ छात्रों को तकनीकी प्रशिक्षण देना नहीं है, बल्कि देश में ऐसा मजबूत डिजाइन इकोसिस्टम तैयार करना भी है, जहां विद्यार्थी, शोध संस्थान, स्टार्टअप और उद्योग मिलकर स्वदेशी चिप तकनीक विकसित कर सकें।
68 हजार से अधिक छात्रों को मिला प्रशिक्षण
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चिप्स से स्टार्टअप्स कार्यक्रम के तहत देशभर के 315 शैक्षणिक संस्थानों में सेमीकंडक्टर डिजाइन से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं। इन संस्थानों में छात्रों को चिप डिजाइन, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से परिचित कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के तहत छात्रों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स तक पहुंच भी उपलब्ध कराई गई है। इन टूल्स की मदद से विद्यार्थी वास्तविक चिप डिजाइन और उससे जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। इससे उन्हें केवल सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक अनुभव भी हासिल हो रहा है।
85 हजार इंजीनियर तैयार करने का लक्ष्य
चिप्स से स्टार्टअप्स कार्यक्रम का बड़ा लक्ष्य भारत में सेमीकंडक्टर क्षेत्र के लिए 85,000 कुशल इंजीनियरों की प्रतिभा तैयार करना है। इसके जरिए वीएलएसआई और एम्बेडेड सिस्टम डिजाइन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में प्रशिक्षित इंजीनियरों और डिजाइन विशेषज्ञों की मांग भी बढ़ रही है। ऐसे में सरकार का यह कार्यक्रम देश में भविष्य की तकनीकी जरूरतों के लिए एक मजबूत प्रतिभा आधार तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्टार्टअप और इंडस्ट्री को भी जोड़ने पर जोर
चिप्स से स्टार्टअप्स नाम से ही स्पष्ट है कि इस पहल का मकसद छात्रों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ उन्हें स्टार्टअप और उद्योग से जोड़ना भी है। कार्यक्रम के जरिए अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे डिजाइन और प्रोटोटाइप तैयार करना है, जिन्हें आगे चलकर व्यावसायिक उत्पादों में बदला जा सके। इससे भारत में फैबलेस सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करने और घरेलू चिप डिजाइन कंपनियों के विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सरकारी पहल के तहत शैक्षणिक संस्थानों में आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें सिनोप्सिस, केडेंस, सीमेंस, रेनेसास, एएनएसआईएस और एएमडी जैसी कंपनियों से जुड़े टूल्स शामिल हैं। इससे छात्रों और शोधकर्ताओं को उद्योग में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों पर काम करने का अवसर मिल रहा है।
सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत की बढ़ती तैयारी
भारत पिछले कुछ वर्षों से सेमीकंडक्टर क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक पूरी वैल्यू चेन में देश की क्षमता विकसित करना है।
इसी दिशा में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत कई योजनाएं पर काम किया जा रहा है। चिप्स से स्टार्टअप्स कार्यक्रम इस पूरी रणनीति में प्रतिभा और डिजाइन क्षमता विकसित करने का अहम हिस्सा है। इसके जरिए देश में ऐसे इंजीनियर और शोधकर्ता तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जो भविष्य में भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग को आगे बढ़ा सकें।
अब आगे क्या?
सरकार अब सेमीकंडक्टर प्रशिक्षण के इस नेटवर्क को और विस्तार देने की तैयारी में है। मार्च 2026 में सरकार ने बताया था कि चिप्स से स्टार्टअप्स के तहत 315 संस्थानों में गतिविधियां चल रही हैं और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के तहत इसे 500 शैक्षणिक संस्थानों तक विस्तार देने का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यक्रम की सफलता भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर तकनीक को रणनीतिक क्षेत्र माना जा रहा है। चिप डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता से भारत को तकनीकी क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और स्टार्टअप के नए अवसर भी मिल सकते हैं। 68,000 से अधिक छात्रों का प्रशिक्षण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले वर्षों में 85,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षित करने और शैक्षणिक संस्थानों, स्टार्टअप तथा उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने से भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन इकोसिस्टम को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।





