पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ एक बड़े सैन्य हमले को आखिरी क्षणों में रद्द करने का फैसला लिया। ट्रंप के मुताबिक यह हमला दूसरे विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभियान हो सकता था, और अमेरिकी सेनाएं पूरी तरह तैयार अवस्था में थीं। इसी बीच गाजा पट्टी में इजरायली हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
ट्रंप ने आखिर क्यों टाला ईरान पर हमला
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के हवाले से आई जानकारी के अनुसार, हाल की सैन्य गतिविधियों के बाद ईरान अब परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बातचीत के लिए पहले से ज्यादा तैयार नजर आ रहा है। यही वजह मानी जा रही है कि ट्रंप प्रशासन ने सैन्य कार्रवाई की बजाय कूटनीतिक रास्ता अपनाने का फैसला किया। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी ट्रंप के साथ फोन पर बातचीत में क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस समय सैन्य दबाव बनाए रखते हुए भी एक जल्दी समझौते की संभावना तलाश रहा है, ताकि क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव से बचा जा सके।
इसके अलावा लाल सागर संकट को लेकर भी कुछ राहत भरी खबरें सामने आई हैं। शिपिंग आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब से तेल ले जा रहे दो बड़े टैंकर जहाज बाब-अल-मंडेब जलडमरूमध्य से होकर सुरक्षित निकल चुके हैं, जिसे क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
गाजा में इजरायली हमलों से मौतों का आंकड़ा बढ़ा
दूसरी तरफ गाजा पट्टी की स्थिति अब भी बेहद गंभीर बनी हुई है। स्थानीय चिकित्सा सूत्रों के मुताबिक रविवार तड़के से अब तक इजरायली हमलों में कई लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। गाजा शहर के पश्चिमी इलाके में एक अपार्टमेंट पर हुए हमले और दीर अल-बलाह के दक्षिणी हिस्से में एक घर पर हुई कार्रवाई में भी जनहानि की खबरें आई हैं। इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है।
हमास निरस्त्रीकरण योजना पर बढ़ता विवाद
गाजा में युद्धविराम और आगे की रणनीति को लेकर एक नई योजना पर बातचीत चल रही है, जिसमें हमास के निरस्त्रीकरण और इजरायली सेना की वापसी की बात शामिल है। ट्रंप ने दावा किया था कि इजरायल इस नई योजना से संतुष्ट है, लेकिन इजरायली सरकार के भीतर से आई प्रतिक्रियाएं कुछ और ही कहानी बयां करती हैं। एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से कहा गया कि हमास की तरफ से "वास्तविक" निरस्त्रीकरण के बिना इजरायल मौजूदा तय सीमा से पीछे नहीं हटेगा। वहीं इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर ने सोशल मीडिया पर इस योजना को सिरे से खारिज करते हुए इसे "अस्वीकार्य" करार दिया है। इससे साफ है कि इजरायली सरकार के भीतर भी इस मुद्दे पर एकराय नहीं है, जिससे शांति प्रक्रिया की राह आसान नहीं दिखती।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आगे की चुनौतियां
मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल नहीं कि पश्चिम एशिया में शांति की राह अभी भी लंबी और जटिल बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका और सऊदी अरब जैसे देश कूटनीतिक समाधान पर जोर दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ गाजा में जारी हिंसा और इजरायली सरकार के भीतर मतभेद स्थिति को और उलझा रहे हैं। आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच होने वाली किसी भी नई बातचीत पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी रहेंगी, क्योंकि इसका असर सिर्फ इस क्षेत्र तक सीमित नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।





