ब्रेकिंग
लखनऊ में आज सुबह भारी बारिश दर्ज की गईसंसद का विशेष सत्र कल से शुरू होगाशेयर बाजार में तेजी, सेंसेक्स 500 अंक उछला
होमCrimeयूपी में साइ-वज्र अभियान: 773 साइबर आरोपी गिरफ्तार
Crime

यूपी में साइ-वज्र अभियान: 773 साइबर आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश पुलिस के साइ-वज्र-1 अभियान में 773 गिरफ्तारियां और 865 नई FIR दर्ज होने का दावा किया गया है। कार्रवाई 17 अवैध कॉल सेंटरों तक पहुंची।

India Junction News Desk
2/8/2026
यूपी में साइ-वज्र अभियान: 773 साइबर आरोपी गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में साइबर ठगी नेटवर्क पर विशेष कार्रवाई

उत्तर प्रदेश पुलिस ने राज्यव्यापी साइबर-अपराध विरोधी अभियान ‘साइ-वज्र-1’ के दौरान 773 लोगों को गिरफ्तार करने और 865 नई प्राथमिकी दर्ज करने की जानकारी दी है। उपलब्ध आधिकारिक बयानों और समकालीन रिपोर्टों के अनुसार यह अभियान 7 से 13 जुलाई 2026 तक चलाया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई में 17 अवैध कॉल सेंटरों के खिलाफ कदम उठाए गए और जांच में 1,158 करोड़ रुपये से अधिक से जुड़े साइबर धोखाधड़ी मामलों के लिंक सामने आए। ये आंकड़े जांच एजेंसियों के दावे हैं; प्रत्येक आरोपी के विरुद्ध आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।

‘साइ-वज्र-1’ अभियान कैसे चला

रिपोर्टों के अनुसार उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा की ऑनलाइन समीक्षा बैठक के बाद साइबर अपराध मुख्यालय ने संदिग्ध नेटवर्क के बारे में खुफिया रिपोर्ट तैयार कीं। इन्हें सभी पुलिस आयुक्तालयों और जिलों के साथ साझा किया गया, जिसके आधार पर एक सप्ताह का समन्वित अभियान चलाया गया। ऐसे अभियानों में स्थानीय थाने, साइबर क्राइम इकाइयां, तकनीकी विशेषज्ञ और वित्तीय जांच से जुड़े अधिकारी एक साथ काम करते हैं। डिजिटल अपराध अक्सर एक जिले या एक राज्य तक सीमित नहीं रहता, इसलिए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, इंटरनेट कनेक्शन और डिजिटल भुगतान के रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण होती है।

म्यूल खाते और अवैध डिजिटल ढांचे पर फोकस

पुलिस के मुताबिक कार्रवाई के दौरान 3,866 म्यूल बैंक खातों से संबंधित कार्रवाई, पांच सिम बॉक्स और 11 अवैध सिम विक्रेताओं के खिलाफ कदम भी शामिल रहे। म्यूल खाता सामान्य तौर पर ऐसा बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर किसी दूसरे व्यक्ति या नेटवर्क के पैसे प्राप्त करने और आगे भेजने के लिए करता है। साइबर ठगी के मामलों में इस तरह के खातों की पहचान महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि यही रकम की आवाजाही को छिपाने का माध्यम बन सकते हैं। हालांकि किसी खाते या नंबर से संबंध अपने आप अपराध सिद्ध नहीं करता; जांच एजेंसियों को प्रत्येक मामले में साक्ष्य जुटाकर कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करनी होती है।

नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है

साइबर ठगी का असर केवल वित्तीय नुकसान तक सीमित नहीं रहता। पीड़ितों को पहचान की चोरी, खाते तक अनधिकृत पहुंच, भावनात्मक दबाव और कई बार कानूनी या बैंकिंग प्रक्रिया की जटिलताओं से भी गुजरना पड़ता है। फर्जी ग्राहक सेवा नंबर, निवेश का झांसा, नौकरी या लोन के नाम पर प्रस्ताव, डिजिटल गिरफ्तारी जैसे डर पैदा करने वाले कॉल और ओटीपी मांगने वाले संदेश आम तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके हैं। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऐप के मामले में सावधानी पहली सुरक्षा है। बैंक, यूपीआई सेवा या सरकारी संस्था के नाम से आने वाला संदेश भी सत्यापित माध्यम से जांचे बिना भरोसेमंद नहीं मानना चाहिए।

ठगी का शिकार होने पर तुरंत क्या करें

वित्तीय साइबर ठगी की आशंका होने पर समय बहुत अहम होता है। पीड़ित को तुरंत 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन पर संपर्क करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। संबंधित बैंक या भुगतान सेवा को भी बिना देरी सूचित करना चाहिए ताकि संदिग्ध लेन-देन को रोका या ट्रैक किया जा सके। स्क्रीनशॉट, कॉल विवरण, संदेश, भुगतान रसीद और संदिग्ध लिंक जैसी जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए; यह जांच में सहायक हो सकती है। किसी व्यक्ति को पासवर्ड, ओटीपी, कार्ड पिन या रिमोट-एक्सेस ऐप की अनुमति कभी साझा नहीं करनी चाहिए।

गिरफ्तारी के बाद न्यायिक प्रक्रिया

पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी किसी मामले की जांच का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन यह दोषसिद्धि नहीं है। भारतीय कानूनी व्यवस्था में आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया, वकील की सहायता और निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार है। पुलिस का दायित्व साक्ष्य जुटाना और आरोपपत्र के जरिए अदालत के सामने अपना मामला रखना है; अपराध सिद्ध करने का अंतिम अधिकार न्यायालय के पास है। इसलिए साइबर अपराध की खबरों में नाम या अधूरे सोशल मीडिया दावे साझा करते समय जिम्मेदारी जरूरी है। जांच से जुड़ी गोपनीय जानकारी या किसी असत्यापित पहचान को फैलाना निर्दोष लोगों को नुकसान पहुंचा सकता है।

आगे की चुनौती

साइबर अपराध की प्रकृति लगातार बदलती रहती है। एक नेटवर्क पर कार्रवाई के बाद अपराधी नए नंबर, खाते, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म या तकनीकी तरीके अपना सकते हैं। इसलिए कानून प्रवर्तन की कार्रवाई के साथ नागरिक जागरूकता, बैंकों की त्वरित प्रतिक्रिया, दूरसंचार कंपनियों की निगरानी और डिजिटल साक्षरता भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश पुलिस का यह अभियान संगठित साइबर ठगी के खिलाफ कार्रवाई के पैमाने को दिखाता है, लेकिन टिकाऊ समाधान के लिए शिकायतों पर तेज प्रतिक्रिया और रोकथाम दोनों पर लगातार काम करना होगा।

स्रोत और संपादकीय नोट

यह मूल रिपोर्ट उत्तर प्रदेश पुलिस से संबंधित उपलब्ध सूचनाओं और 16-17 जुलाई 2026 की विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों पर आधारित है। इसमें दिए गए गिरफ्तारी, प्राथमिकी, कॉल सेंटर और वित्तीय लिंक के आंकड़े पुलिस द्वारा बताए गए हैं। सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

संबंधित समाचार

न्यूज अलर्ट पाएं

सबसे पहले ताज़ा खबरें पाने के लिए सब्सक्राइब करें