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UPI की ग्लोबल उड़ान, 11 देशों में पहुंच

भारत का UPI अब 11 देशों में ऑपरेशनल हो चुका है। 10 साल में UPI ने डिजिटल भुगतान की दुनिया में बड़ी पहचान बनाई है और भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक स्तर पर पहुंचाया है।

India Junction News Desk
25/8/2026
UPI की ग्लोबल उड़ान, 11 देशों में पहुंच

भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI अब सिर्फ देश के अंदर पैसे भेजने का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि UPI ने पूरी दुनिया में भारत की डिजिटल ताकत का लोहा मनवा दिया है। 25 अगस्त 2016 को शुरू हुआ UPI अब अपने सफर के 10 साल पूरे कर चुका है। इन 10 सालों में UPI ने भारत में डिजिटल लेनदेन का तरीका पूरी तरह बदल दिया है और अब UPI का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में होने लगा है। सरकारी आंकड़ों को देखें तो UPI अभी 11 देशों में काम कर रहा है और 2026 तक UPI के जरिए हर रोज करीब 66 करोड़ लेनदेन होने का अनुमान है। जुलाई 2026 में तो UPI ने एक ही महीने में 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन करके एक नया रिकॉर्ड भी बना दिया।

11 देशों में पहुंचा भारत का UPI

पिछले कुछ सालों में UPI का पूरी दुनिया में विस्तार बहुत तेजी से हुआ है। फिलहाल UPI भूटान, नेपाल, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस, कतर, कंबोडिया, ग्रीस और मालदीव में चालू है। अलग-अलग देशों में लोग अपनी जरूरत के हिसाब से UPI का इस्तेमाल दुकानों पर पेमेंट करने या विदेश से पैसे भेजने के लिए कर रहे हैं। जून 2026 में कंबोडिया में UPI की सुविधा शुरू हुई, तो वहीं ग्रीस के साथ भारत ने सीमा पार पैसे भेजने की सुविधा भी शुरू कर दी है। जुलाई में मालदीव के पेमेंट सिस्टम ‘फवारा’ के साथ भी UPI को जोड़ दिया गया। इससे भारत और दूसरे देशों के बीच डिजिटल तरीके से पैसे भेजना काफी आसान हो गया है।

10 साल में हजारों गुना बढ़ा ट्रांजैक्शन

UPI कितनी सफल रही है, इसका अंदाजा इसके आंकड़ों से लगाया जा सकता है। साल 2016-17 में UPI के जरिए सिर्फ 1.78 करोड़ ट्रांजैक्शन हुए थे। लेकिन वित्त वर्ष 2025-26 तक यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से भी ज्यादा हो गई। इसका मतलब है कि सिर्फ दस साल के भीतर UPI के लेनदेन में करीब 13,000 गुना की बढ़ोतरी हुई है। इसी दौरान लेनदेन की कुल रकम भी 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 314 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। अकेले जुलाई 2026 में ही UPI ने 2,366 करोड़ ट्रांजैक्शन किए, जिनकी कुल कीमत करीब 29.88 लाख करोड़ रुपये थी।

भारत के डिजिटल पेमेंट में 84 फीसदी हिस्सेदारी

आज के समय में भारत में डिजिटल पेमेंट की बात हो और UPI का जिक्र न आए, ऐसा मुमकिन नहीं है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में होने वाले कुल डिजिटल पेमेंट में UPI की हिस्सेदारी करीब 84 फीसदी रही। इतना ही नहीं, साल 2025 में दुनिया भर में होने वाले रियल-टाइम पेमेंट में भी UPI का योगदान करीब 49 फीसदी रहा। इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया में होने वाले हर दो रियल-टाइम पेमेंट में से एक पेमेंट UPI के जरिए किया गया था। UPI की सबसे अच्छी बात यह है कि यह बहुत तेज और आसान है, जिससे छोटे दुकानदार हों या बड़े व्यापारी, सभी के लिए डिजिटल पेमेंट करना बहुत सरल हो गया है।

741 बैंक UPI नेटवर्क से जुड़े

जब UPI शुरू हुआ था, तब इससे बहुत कम बैंक जुड़े थे, लेकिन अब UPI का नेटवर्क बहुत बड़ा हो चुका है। जुलाई 2026 तक 741 बैंक UPI के साथ जुड़ चुके थे। अगस्त 2016 में जहां सिर्फ करीब 90 हजार लेनदेन होते थे, वहीं आज UPI के जरिए रोजाना करोड़ों लेनदेन हो रहे हैं। UPI ने सिर्फ बड़े शहरों में ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और गांवों में भी डिजिटल पेमेंट को घर-घर पहुंचा दिया है। QR कोड की वजह से छोटे व्यापारियों के लिए पैसा लेना आसान हो गया है और ग्राहकों को भी अब जेब में कैश रखने की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती।

अब सीमा पार भुगतान पर फोकस

अब UPI का अगला बड़ा लक्ष्य दूसरे देशों के साथ डिजिटल पेमेंट को और आसान बनाना है। भारत अब UPI को दूसरे देशों के सिस्टम से जोड़कर अंतरराष्ट्रीय लेनदेन को सरल बनाने की कोशिश कर रहा है। सिंगापुर के साथ UPI को PayNow से जोड़ दिया गया है, और ग्रीस व मालदीव के साथ भी सीमा पार पेमेंट की सुविधाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे भारतीय पर्यटकों, छात्रों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों को बहुत फायदा होगा। साथ ही, इससे दुनिया के सामने भारत के डिजिटल मॉडल की पहचान और मजबूत होगी।

कुल मिलाकर देखा जाए तो UPI के 10 साल का यह सफर भारत की डिजिटल क्रांति की एक शानदार कहानी है। जो सिस्टम एक दशक पहले बहुत कम बैंकों और लेनदेन के साथ शुरू हुआ था, वह आज दुनिया के सबसे बड़े पेमेंट प्लेटफॉर्म में बदल चुका है। 11 देशों में मौजूदगी, 741 बैंकों का साथ और रोजाना 66 करोड़ लेनदेन यह साबित करते हैं कि UPI अब सिर्फ भारत की जरूरत नहीं, बल्कि दुनिया के डिजिटल भविष्य का एक अहम हिस्सा बन रहा है। आने वाले समय में UPI का दायरा और भी बढ़ने वाला है।

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