मुख्य सचिव और गृह सचिव पद से हटाए गए
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल की मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को अंतरिम रूप से जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी तरह गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीणा को भी पद से हटाने का आदेश दिया गया है। आयोग का मानना है कि चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक फैसलों में निष्पक्षता बनाए रखना बेहद जरूरी है, इसलिए यह कदम उठाया गया।
DGP और पुलिस कमिश्नर भी बदले
प्रशासनिक फेरबदल का असर पुलिस विभाग पर भी पड़ा है। चुनाव आयोग ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को हटाने के निर्देश दिए हैं और नए अधिकारी की नियुक्ति के लिए राज्य सरकार से तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल मांगा है।
इसके अलावा कोलकाता और कई प्रमुख शहरों के पुलिस कमिश्नर तथा कई जिलों के SP और DIG स्तर के अधिकारियों का भी तबादला किया गया है।
अब तक कितने अधिकारियों के ट्रांसफर?
अब तक चुनाव आयोग की कार्रवाई में कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया या बदला गया है। इनमें शामिल हैं:
- मुख्य सचिव
- गृह सचिव
- पुलिस महानिदेशक (DGP)
- कोलकाता पुलिस कमिश्नर
- कई जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP)
- कुछ जिलों के जिलाधिकारी (DM)
- DIG और IG स्तर के अधिकारी
कुल मिलाकर दर्जनों प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के तबादले किए जा चुके हैं और आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ सकती है।
चुनाव आयोग का क्या कहना है?
चुनाव आयोग का स्पष्ट कहना है कि चुनाव के दौरान प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह निष्पक्ष रहनी चाहिए। आयोग के मुताबिक, जिन अधिकारियों को लंबे समय से एक ही जगह तैनात किया गया था या जिनकी भूमिका को लेकर शिकायतें थीं, उन्हें चुनाव ड्यूटी से हटाया जा रहा है।
आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि खाली हुए पदों पर जल्द से जल्द नए अधिकारियों की नियुक्ति की जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।
चुनावी माहौल में बढ़ी सियासत
इस प्रशासनिक फेरबदल को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव आयोग का यह फैसला चुनाव को निष्पक्ष बनाने के लिए जरूरी कदम है।
वहीं सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं का कहना है कि प्रशासनिक बदलाव चुनाव के समय सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं और इसे राजनीतिक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
चुनाव आयोग आने वाले दिनों में राज्य के चुनावी माहौल और प्रशासनिक व्यवस्था की लगातार समीक्षा करेगा। अगर जरूरत पड़ी तो और भी अधिकारियों के तबादले किए जा सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव की घोषणा के साथ ही अब राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रशासनिक स्तर पर भी सख्ती बढ़ा दी गई है, ताकि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराया जा सके।





