गुवाहाटी/असम : असम की राजनीति में बदरुद्दीन अजमल एक बार फिर चर्चा में हैं। सवाल यह है कि उनकी राजनीति से सबसे ज्यादा नुकसान किसे हो रहा है - बीजेपी को या कांग्रेस को ? मौजूदा हालात और पिछले चुनावी आंकड़ों पर नजर डालें तो यह साफ हो जाता है कि अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट कांग्रेस के वोट बैंक को सीधे प्रभावित करती है।
असम में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है, लेकिन ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की मौजूदगी इसे त्रिकोणीय बना देती है। अजमल की पकड़ मुस्लिम वोटर्स पर है, जो परंपरागत रूप से कांग्रेस के साथ रहे हैं। जब ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट अलग से चुनाव लड़ती है, तो यह वोट बैंक दो हिस्सों में बंट जाता है, जिससे कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो जाती है।
कई सीटों पर कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के वोट मिलाकर बीजेपी से ज्यादा होते हैं, लेकिन अलग-अलग चुनाव लड़ने से वोट बंट जाते हैं और बीजेपी को फायदा मिलता है। यही वजह है कि अजमल को अक्सर “वोट कटवा फैक्टर” के रूप में देखा जाता है, जो कांग्रेस के लिए चुनौती बनते हैं।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है। अजमल की राजनीति और उनके बयान चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं, जिससे ध्रुवीकरण बढ़ता है। इस ध्रुवीकरण से बीजेपी को फायदा होता है, क्योंकि वह अपने कोर वोटर्स को मजबूती से जोड़ने में सफल रहती है। यानी, एक तरफ अजमल कांग्रेस के वोट बैंक को बांटते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी मौजूदगी बीजेपी के लिए राजनीतिक रूप से अनुकूल माहौल तैयार करती है।
भविष्य में अगर कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच गठबंधन होता है, तो असम की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन फिलहाल दोनों पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं, जिससे बीजेपी को सीधा फायदा हो रहा है।
सीधे तौर पर बदरुद्दीन अजमल कांग्रेस को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, क्योंकि उनका वोट बैंक कांग्रेस से जुड़ा है। लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से उनकी राजनीति बीजेपी को मजबूत करने में मदद करती है। यही वजह है कि असम की राजनीति में अजमल एक अहम फैक्टर बने हुए हैं, जो हर चुनाव में जीत-हार का समीकरण बदल देते हैं।





